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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां36एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे का खेल और रिश्ते

फोन पर वह बैंक संदेश देखकर सबकी सांसें रुक गईं। तीन लाख का लेनदेन रिश्तों में गहरी दरार बन गया। भूरे स्वेटर वाले व्यक्ति की खुशी और काले जैकेट वाले का गुस्सा साफ दिख रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत वाली स्थिति कमरे में तैर रही थी। डायनिंग टेबल पर तनाव और बढ़ गया। हर शब्द भारी लग रहा था। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली था।

खामोशी का शोर

ग्रे ड्रेस वाली लड़की की आंखों में सवाल थे। वह चुप खड़ी सब कुछ देख रही थी। पैसे के खेल में इंसानियत कहीं खो गई है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत कहकर वह खुद को समझा रही होगी। कमरे का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। अभिनय बहुत प्राकृतिक लगा। दर्शक को यह पसंद आएगा।

डिनर टेबल पर जंग

डिनर का सीन देखकर लगा जैसे युद्ध थम गया हो। सूट वाला व्यक्ति सबको संभालने की कोशिश कर रहा था। खाना ठंडा पड़ गया पर बहस गर्म थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इस कहानी का सार है। वेटर की एंट्री ने माहौल और अजीब बना दिया। सबकी नजरें चुरा रही थीं।

गिलास और गुस्सा

काले जैकेट वाले ने पानी का गिलास पकड़ रखा था पर पिया नहीं। उसकी चुप्पी सबसे तेज शोर थी। भूरे स्वेटर वाले की सफाई बेकार लग रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत वाली फीलिंग हर फ्रेम में थी। रिश्तों की यह जंग कब तक चलेगी। यह सवाल सबके मन में था।

भरोसे का संकट

कहानी में पैसा ही विलन नहीं, भरोसा भी टूट रहा है। फोन स्क्रीन का क्लोजअप बहुत असरदार था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत डायलॉग दिल को छू गया। डायनिंग टेबल पर सबकी दूरियां साफ दिख रही थीं। लक्जरी घर में सुकून नहीं है। यह सच्चाई कड़वी है।

सफेद पोशाक का दर्द

सफेद ड्रेस वाली लड़की सबसे शांत थी पर उसका दर्द दिख रहा था। सबकी नजरें एक दूसरे से चुरा रही थीं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत कहानी की गहराई बताता है। भूरे स्वेटर वाले की हंसी झूठी लग रही थी। बहुत ही रियलिस्टिक ड्रामा है। देखने लायक है।

तेज एडिटिंग और तनाव

एडिटिंग बहुत तेज थी, कमरे से डायनिंग तक का सफर। हर कट के साथ तनाव बढ़ता गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत सीन के बीच में फिट बैठता है। कैमरा एंगल्स ने इमोशन को पकड़ा। दर्शक को बांधे रखने की कला है इसमें। कहानी आगे बढ़ेगी।

इशारों की भाषा

बिना डायलॉग के भी कहानी समझ आ गई। इशारों में सब कुछ कह दिया गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत इसी कशमकश को बताता है। भूरे स्वेटर वाले को चुप रहना चाहिए था। काले जैकेट वाले का गुस्सा जायज लग रहा था। यह वीडियो शानदार है।

रोशनी में अंधेरा

बड़ी टेबल पर सब बैठे थे पर दिल दूर थे। चैंडलियर की रोशनी में भी अंधेरा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत माहौल को बयां करता है। सूट वाला व्यक्ति बीच में बचाने आया पर नाकाम रहा। यह कहानी बहुत गहरी है। सबको सोचने पर मजबूर करती है।

अगले एपिसोड का इंतजार

अंत में सब अनसुलझे सवाल छोड़ गए। बैंक मैसेज ने सब बदल दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत अगले एपिसोड की उम्मीद बढ़ाता है। किरदारों की केमिस्ट्री बहुत अच्छी है। नेटशॉर्ट पर देखने का अनुभव बेहतरीन रहा। मैं फिर देखूंगा।