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गाँव का गौरववां59एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से का पैमाना

ग्रे शर्ट वाले युवक की आँखों में जो आग देखी मैंने, वह साधारण नहीं थी। जब उसने कागज पर पैर रखा, तो लगा जैसे किसी बड़े अपमान का बदला ले रहा हो। गाँव का गौरव नामक इस ड्रामे में भावनाओं का जो खेल दिखाया गया है, वह दिल को छू लेता है। हर किरदार की पीड़ा साफ झलक रही है। दर्शक भी इसमें शामिल हो जाते हैं।

आँसुओं की बाढ़

जमीन पर गिरी हुई लड़की की चीख सुनकर रूह कांप गई। उसकी आँखों में बेबसी साफ दिख रही थी। गाँव का गौरव की कहानी में जिस तरह परिवार के रिश्तों को दिखाया गया है, वह बहुत ही दर्दनाक है। सफेद कार्डिगन वाली बहन का रोना किसी के भी दिल को पिघला सकता है। यह दृश्य बहुत ही हृदयस्पर्शी था।

अंतिम विदाई

अंत में जब वह युवक तस्वीर के सामने खड़ा हुआ, तो माहौल बहुत भारी हो गया। मोमबत्ती की रोशनी में उसका चेहरा देखकर लगा कि वह अंदर से टूट चुका है। गाँव का गौरव में दिखाई गई यह श्रद्धांजलि दृश्य बहुत ही भावुक कर देने वाला था। हर कोई अपनी आँखें पोंछता हुआ पाया गया। सच्चाई सामने आ गई।

टकराव की घड़ी

दो युवकों के बीच जो तनाव दिखाया गया, वह हवा में तैर रहा था। ग्रे सूट वाला जमीन पर बैठा हुआ था, लेकिन उसकी हार नहीं मान रहा था। गाँव का गौरव के इस एपिसोड में संघर्ष का जो चित्रण है, वह बहुत ही तीव्र है। दर्शक भी इस झगड़े का अंत जानने के लिए बेताब हैं। कौन जीतेगा यह देखना है।

बूढ़े की हैरानी

नीली जैकेट वाले बुजुर्ग के चेहरे पर जो झटका लगा, वह लाजवाब था। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं जब सब कुछ बदलता हुआ दिखा। गाँव का गौरव में बड़ों की भावनाओं को भी बहुत अच्छे से पिरोया गया है। उनका डर और चिंता हर किसी को महसूस हुई। अभिनय बहुत शानदार रहा।

कागज का अपमान

जब उसने कागज को अपने पैरों तले रौंद दिया, तो लगा कि अब कोई रास्ता नहीं बचा। यह एक्शन बहुत ही प्रतीकात्मक था। गाँव का गौरव में दिखाए गए इस छोटे से विवरण ने पूरी कहानी का मोड़ बदल दिया। ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। निर्देशक की सोच सराहनीय है।

आँख का कतरा

क्लोज़ अप शॉट में जब आँख से आँसू गिरता हुआ दिखा, वह पल जादुई था। ग्रे शर्ट वाले हीरो की मजबूरी उस एक बूंद में समाई हुई थी। गाँव का गौरव जैसे शो में ऐसे सूक्ष्म अभिनय की बहुत कद्र की जानी चाहिए। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। आँसू की ताकत बहुत बड़ी है।

लाल पोशाक का रंग

लाल ड्रेस वाली का चेहरा भी काफी चिंतित दिखाई दिया। वह सब कुछ देख रही थी लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी। गाँव का गौरव में हर किरदार का अपना महत्व है। उसकी चुप्पी भी शोर मचा रही थी उस वक्त। बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ा। सब हैरान थे। माहौल में तनाव था।

मुट्ठी का बंधन

जब उसने गुस्से में अपनी मुट्ठी भींची, तो समझ गया कि अब वह चुप नहीं बैठेगा। उसकी नसें तन गई थीं और चेहरा कठोर हो गया था। गाँव का गौरव की कहानी में अब बड़ा बदलाव आएगा। यह संकेत मिल चुका है कि आगे क्या होने वाला है। रोमांच बढ़ गया है।

घर की यादें

पुराने घर की दीवारें और वह अंतिम संस्कार का मंच, सब कुछ बहुत असली लगा। ग्रे शर्ट वाला लड़का जब अंदर गया, तो लगा वह अपने अतीत से मिलने जा रहा है। गाँव का गौरव में सेट डिजाइन और माहौल बहुत ही दमदार है। देखने वाला हर व्यक्ति इसमें खो जाता है। कला बहुत बढ़िया है।