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गाँव का गौरववां29एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

पिता के आँसू और उम्मीदें

पिता की आँखों में आँसू देखकर दिल भर आया। जब उन्होंने अंगूठा दिखाया, तो लगा जैसे उन्होंने अपने सपने बेटे को सौंप दिए हैं। गाँव का गौरव में ऐसे पल बहुत हैं जो सीधे दिल पर वार करते हैं। मिट्टी की खुशबू और परिवार का प्यार साफ़ झलकता है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव भी काफी अच्छा रहा, बिना रुकावट के कहानी आगे बढ़ती है। यह सिर्फ एक विदाई नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का बोझ उठाने का पल है। भावनाएं बहुत गहरी हैं।

माँ का प्यार और त्याग

माँ का वह पल जब वह पसीना पोंछ रही थीं, बहुत ही भावुक था। चेहरे की मुस्कान में छिपी चिंता को कोई ही समझ सकता है। गाँव का गौरव की कहानी सादगी में ही असली ताकत ढूंढती है। ईंटों वाली दीवार और पुरानी साइकिलें उस दौर की याद दिलाती हैं। बेटे की आँखों में दृढ़ संकल्प देखकर लगता है कि वह जरूर सफल होगा। परिवार के त्याग को सलाम। हर माँ का प्यार अनंत होता है।

नीली गाड़ी और सपने

नीली तीन पहिया गाड़ी सिर्फ वाहन नहीं, उम्मीदों की सवारी है। जब वह उसे चालू करता है, तो धूल उड़ती है जैसे रास्ते की मुश्किलें। गाँव का गौरव में दिखाया गया संघर्ष बहुत असली लगता है। काले सफेद पुरानी याद में मेहनत का पसीना साफ़ दिखता था। युवा पीढ़ी की जिद्द और बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलकर एक नई राह बनाते हैं। बहुत प्रेरणादायक दृश्य है। मेहनत रंग लाएगी।

कच्ची सड़क का सफर

खेतों के बीच से गुजरती वह कच्ची सड़क जीवन के सफर जैसी लगती है। धूल उड़ती है पर रुकना नहीं है। गाँव का गौरव ने ग्रामीण जीवन की खूबसूरती को बहुत बारीकी से पकड़ा है। पिता का रोना और बेटे का चुप रहना सब कुछ कह जाता है। शब्दों की जरूरत नहीं होती जब भावनाएं इतनी गहरी हों। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना सुकून देता है। आगे की कहानी का बेसब्री से इंतजार है। रास्ता लंबा है।

दीवारों पर लिखी कहानी

अखबार के पुराने टुकड़े दीवार पर चिपके हुए हैं, जैसे समय थम गया हो। चारा दुकान का बोर्ड पुराना है पर उम्मीदें नई हैं। गाँव का गौरव में सजावट बहुत ही असली है। हर ईंट पर कहानी लिखी हुई लगती है। बेटे की शर्ट पर पसीना और आँखों में चमक बताती है कि वह पीछे नहीं हटेगा। यह कहानी हर उस इंसान की है जो कुछ बनना चाहता है। सपने सच होंगे।

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