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गाँव का गौरववां32एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

दादी के आंसू

दादी माँ के चेहरे पर वो आंसू देखकर मेरा दिल भी पिघल गया। महंगी कीमती घड़ी चमकदार जरूर थी पर उस लड़के के दिए हुए लोकेट में असली कीमत थी। गाँव का गौरव ने साबित किया कि प्यार की कोई कीमत नहीं होती। ये दृश्य बहुत भावुक कर देने वाला था और परिवार के गहरे बंधन को दिखाता है।

लाल साड़ी का अंदाज

लाल कपड़े वाली महिला का अंदाज शुरू में थोड़ा घमंडी लगा लेकिन कहानी में जो मोड़ आया वो कमाल का था। गाँव का गौरव में दिखाया गया संघर्ष बहुत असली लगता है। शहर और गाँव के सोच का अंतर बहुत बखूबी दिखाया गया है इसमें जो सोचने पर मजबूर करता है।

हरे डब्बे का राज

हरे डब्बे में वो कीमती घड़ी देखकर सब हैरान रह गए थे। पर बुजुर्ग आदमी की खुशी देखने लायक थी जब उसने उसे पहना। गाँव का गौरव में दिखाया गया ये उपहार बहुत कीमती लगा। पैसे से रिश्ते नहीं खरीदे जा सकते बस इसने ये साबित कर दिया।

सादगी की जीत

सादी शर्ट वाले लड़के की सादगी दिल को छू गई। उसने बोरे में से जो निकाला वो सबसे अनमोल था। गाँव का गौरव में ऐसे किरदार ही जान डालते हैं। उसने दादी को जो सम्मान दिया वो किसी अमीर आदमी ने नहीं दिया जो बहुत सराहनीय है।

दोनों का टकराव

दोनों पुरुषों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति बहुत अच्छे से दिखाई गई। एक ने दिखावा किया तो दूसरे ने दिल से दिया। गाँव का गौरव की कहानी में ये टकराव सबसे अच्छा लगा। दर्शक भी इसमें खो जाता है कि असली विजेता कौन है।

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