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गाँव का गौरववां52एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार की एंट्री ने हिला दिया

कार का आगमन देखकर ही लग गया कि कुछ बड़ा होने वाला है। काले जैकेट वाले की एंट्री ने पूरे माहौल को बदल दिया। गाँव का गौरव में ऐसे ड्रामा देखना बहुत रोमांचक है। ग्रे सूट वाले की घबराहट साफ दिख रही थी। क्या यह बदला है या मिलन? हर पल में सस्पेंस बना हुआ है। नेटशॉर्ट पर देखने का मजा ही अलग है।

गुस्से का असली रूप

ग्रे सूट वाले का गिरना और फिर काले जैकेट वाले का गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। भावनाओं का यह खेल बहुत गहरा है। गाँव का गौरव की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। तौलिए वाला व्यक्ति शांत खड़ा था, उसकी चुप्पी सबसे भारी थी। वीडियो की क्वालिटी भी अच्छी है।

बुजुर्गों का दर्द

बुजुर्ग दंपत्ति के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। जब सफेद शर्ट वाली गिर गई तो दिल दहल गया। गाँव का गौरव में परिवारिक रिश्तों की यह जंग बहुत तेज है। काले जैकेट वाले की आँखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। क्या सच सामने आएगा? यह देखना बहुत जरूरी है।

एक्टिंग में जान है

एक्टिंग इतनी जबरदस्त है कि लगता है सब सच हो रहा है। काले जैकेट वाले की आवाज में दर्द था। गाँव का गौरव के इस एपिसोड ने सबको हैरान कर दिया। ग्रे सूट वाले की हरकतें शक पैदा कर रही हैं। कौन सही है और कौन गलत? मुझे यह पता लगाना है।

गाँव और शहर का मिलन

गाँव की मिट्टी और शहर की कार का कंट्रास्ट बहुत अच्छा दिखाया गया है। गाँव का गौरव में सेटिंग बहुत रियल लगती है। जब काले जैकेट वाले ने झुककर प्रणाम किया तो सब चौंक गए। यह सम्मान किस लिए था? कहानी में कई राज छिपे हैं। मुझे अगला पार्ट चाहिए।

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