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गाँव का गौरववां37एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

दादी और पोते का प्यार

दादी के लिए गर्म सूप लेकर आते हुए पोते की आँखों में गहरी चिंता साफ दिख रही थी। इस गाँव का गौरव ने बहुत खूबसूरती से दिखाया कि कैसे छोटे छोटे पल ही रिश्तों की असली ताकत होते हैं। जब दादी ने कांपते हाथों से उसका हाथ पकड़ा तो दिल भर आया। बहुत ही भावुक करने वाला दृश्य था जिसने हर दर्शक को रूला दिया। यह सीन हमें परिवार की अहमियत समझाता है और हमें अपने बुजुर्गों की कद्र करने की प्रेरणा देता है। सच्चा प्यार यहीं दिखाई देता है।

मौत का कच्चा सच

कमरे की पुरानी दीवारें और मिट्टी की खुशबू ने इस कहानी को बहुत असली बना दिया। गाँव का गौरव में ऐसे सीन देखकर लगता है कि हम अपने पुराने घर वापस आ गए हैं। जब दादी का निर्जीव हाथ बिस्तर से नीचे गिरा तो साँसें रुक गईं। मौत के सच को बहुत कच्चे रूप में दिखाया गया है यहाँ। यह दृश्य जीवन की नश्वरता को बयां करता है और दर्शकों के मन पर गहरा असर छोड़ता है। हर कोई इससे सहमत होगा।

अभिनय की मिसाल

नौजवान अभिनेता की आँखों में बहते आँसू देखकर कोई भी पत्थर दिल इंसान नहीं रह सकता। गाँव का गौरव की यह कहानी सिखाती है कि बुजुर्गों का साथ निभाना कितना जरूरी है। अंतिम समय में वह जिस तरह फूट फूट कर रोया। वह दिल को चीर गया। बहुत ही शानदार अभिनय था इसमें जो सबको पसंद आया। इस तरह के किरदार निभाने के लिए बहुत साहस चाहिए होता है। यह कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

दीये की रोशनी में

मिट्टी के दीये की मद्धम रोशनी में यह कहानी और भी गहरी लग रही थी। गाँव का गौरव ने बिना किसी ज्यादा ड्रामे के सीधा दिल पर वार किया। जब पोते ने दादी को गले लगाया तो लगा वक्त वहीं रुक गया हो। ऐसे सीन जीवन की नश्वरता को बहुत तेजी से याद दिलाते हैं। यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है कि हमारे पास कितना समय है। हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए।

धैर्य और प्यार

खाना खिलाते वक्त जो धैर्य और प्यार दिखाया गया वह आज के दौर में कम ही देखने को मिलता है। गाँव का गौरव की यह झलक हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। दादी की मुस्कान और फिर अचानक खामोशी ने सबको झकझोर दिया। बहुत ही संवेदनशील तरीके से यह विषय उठाया गया है। यह वीडियो देखकर मन भारी हो गया और आँखें नम हो गईं। यह बहुत ही प्रेरणादायक है।

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