PreviousLater
Close

गाँव का गौरववां15एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा दृश्य

इस दृश्य में तनाव इतना बढ़ गया कि सांस रुक सी गई। जब बूढ़े व्यक्ति को चोट लगी और वो गिर पड़े, तो सबकी चीखें गूंज उठीं। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ देखकर दिल दहल जाता है। लाल कपड़े और खुशी का माहौल अचानक गम में बदल गया। महिला की आंखों में आंसू और गुस्सा साफ दिख रहा था। यह कहानी बहुत गहरी लग रही है। हर किरदार का दर्द महसूस हुआ। ऐसे ड्रामे देखने का मजा ही अलग है। यह सीरीज जरूर देखें। बहुत ही शानदार प्रदर्शन था सभी का। वाकई में यह कहानी दिल को छू लेती है और अंत तक बांधे रखती है। दर्शक के रूप में मैं पूरी तरह से जुड़ गया हूं।

नौजवान की एंट्री

नौजवान लड़के की एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया। उसके कंधे पर थैला और चेहरे पर गंभीरता थी। गाँव का गौरव की कहानी में यह किरदार बहुत अहम लग रहा है। जब उसने बूढ़ी महिला का हाथ थामा, तो लगा वो कोई वादा निभा रहा है। पीछे खड़ा सूट वाला व्यक्ति भी रहस्यमयी लग रहा था। माहौल में जो चुप्पी थी, वो शोर से ज्यादा डरावनी थी। खाने की मेज पर खून के निशान ने सबको झकझोर दिया। यह सीन बहुत ही तीव्र था। अभिनय बहुत ही लाजवाब रहा। हर एक्सप्रेशन में जान थी। आगे की कहानी जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

मेज पर हुआ हादसा

खाने की मेज पर हुआ झगड़ा देखकर हैरानी हुई। एक पल में सब कुछ बदल गया। गाँव का गौरव में ऐसे ट्विस्ट की उम्मीद नहीं थी। जब वो व्यक्ति दर्द से कराहने लगा, तो महिला रो पड़ी। उसकी चीख में दर्द साफ सुनाई दे रहा था। लाल रंग की सजावट अब खून जैसी लग रही थी। यह दृश्य बहुत ही भावुक कर देने वाला था। युवक का आना किसी मसीहा जैसे लगा। उसने हिम्मत नहीं हारी। ऐसे संघर्ष भरे किरदार हमेशा पसंद आते हैं। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। यह वीडियो देखकर बहुत कुछ सीखने को मिला।

सादगी बनाम चालाकी

गाँव की सादगी और शहर की चालाकी का टकराव साफ दिख रहा है। सूट पहने व्यक्ति की चाल में अकड़ थी। गाँव का गौरव में यह संघर्ष बहुत अच्छे से दिखाया गया है। जब बूढ़े व्यक्ति ने छाती पकड़ी, तो लगा दिल का दौरा पड़ा है। लेकिन खून देखकर समझ आया कि कुछ गड़बड़ है। महिला की घबराहट असली लग रही थी। कैमरा एंगल ने इस दर्द को और बढ़ा दिया। लाल चादर पर खून के धब्बे बहुत गहरे प्रभाव छोड़ते हैं। यह सीन भूलना मुश्किल होगा। सभी कलाकारों ने बहुत मेहनत की है। निर्देशन भी बहुत ही शानदार रहा है।

त्योहार का गम

त्योहार के माहौल में ऐसा हादसा किसी सदमे से कम नहीं था। सब लोग हैरान रह गए। गाँव का गौरव की यह एपिसोड बहुत ही धमाकेदार रही। जब युवक ने थैला उठाया, तो लगा वो कुछ साबित करने आया है। बूढ़ी मां की आंखों में चिंता साफ झलक रही थी। पीछे खड़े लोग भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। यह खामोशी बहुत शोर मचा रही थी। डायरेक्शन बहुत ही दमदार है। हर फ्रेम में कहानी बयां हो रही है। दर्शक के रूप में मैं पूरी तरह से जुड़ गया हूं। यह सीरीज हर किसी को पसंद आएगी।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down