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गाँव का गौरववां28एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

बाजार की शुरुआत

वीडियो की शुरुआत में भीड़भाड़ वाला बाजार दिखाया गया है जहाँ युवाकालीन बेटा अपनी नीली गाड़ी चला रहा है। यह दृश्य बहुत ही असली लगता है। जब वह घर पहुँचता है तो पिता की आँखों में आँसू देखकर दिल भर आया। गाँव का गौरव नामक इस शो में ऐसे ही जज्बात देखने को मिलते हैं। हर कोई अपने घर लौटना चाहता है। यह कहानी बहुत प्यारी है।

पिता का प्यार

बुजुर्ग पिता का चेहरा जब दरवाजे से झांकता है तो हैरानी साफ झलकती है। फिर जब उसे एहसास होता है कि उसका बेटा लौट आया है तो वह रो पड़ते हैं। यह भावनात्मक पल बहुत सुंदर है। गाँव का गौरव की कहानी में परिवार का बंधन सबसे ऊपर है। माँ की दौड़ती हुई आती हुई भी देखने लायक है। सच्चा प्यार यही है। बहुत अच्छा लगा।

माँ की ममता

जब माँ दौड़ती हुई बाहर आती है तो उसकी खुशी देखते ही बनती है। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान सब कुछ कह जाती है। बेटे को देखकर उसका हैरान होना स्वाभाविक है। गाँव का गौरव में दिखाए गए इस रिश्ते ने मुझे बहुत प्रभावित किया। ग्रामीण जीवन की सादगी को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। मुझे यह बहुत पसंद आया।

बेटे की वापसी

युवा बेटा जब गाड़ी से उतरता है तो उसमें एक अलग ही आत्मविश्वास है। उसने मेहनत की है और अब अपने माता-पिता के पास लौटा है। पिता से हाथ मिलाते वक्त जो जुड़ाव दिखा है वह अनमोल है। गाँव का गौरव जैसे शो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाते हैं। यह दृश्य बहुत ही प्रेरणादायक लगा। सबको देखना चाहिए।

आँसू और मुस्कान

पिता की आँखों से बहते आँसू और फिर खुशी से की गई मुस्कान ने दिल जीत लिया। इतने समय बाद मिलने का दर्द और खुशी दोनों एक साथ दिखाई दिए। गाँव का गौरव की इस कहानी में हर पल में जान है। अभिनय बहुत ही स्वाभाविक लगा। ऐसा लगता है कि यह कोई नाटक नहीं बल्कि असली जीवन है। बहुत ही शानदार वीडियो है।

गाँव की सड़कें

कच्ची सड़कें और पुरानी ईंटों वाली दुकानें बहुत ही असली लगती हैं। यह सेटिंग कहानी को जमीन से जोड़ती है। जब बेटा अपनी गाड़ी लेकर आता है तो पूरा माहौल बदल जाता है। गाँव का गौरव में दिखाए गए वातावरण ने मुझे अपने बचपन की याद दिला दी। ऐसे दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं आजकल। बहुत अच्छी कहानी है।

हैरानी का पल

पहले पिता हैरान होते हैं और फिर माँ हैरान होती है। दोनों के चेहरे के भाव बहुत ही शानदार हैं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनका बेटा वापस आ गया है। गाँव का गौरव की इस कड़ी में ऐसे ही कई मोड़ हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर एक्ट्रेशन पर ध्यान दिया गया है जो सराहनीय है। मुझे यह बहुत पसंद आया।

परिवार का मिलन

जब पूरा परिवार एक साथ होता है तो जो खुशी होती है वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। बेटे का कंधे पर हाथ रखना और माँ का पास खड़ा होना बहुत प्यारा है। गाँव का गौरव में दिखाए गए इस मिलन ने मुझे बहुत खुश किया। ऐसे पल जीवन में बहुत खास होते हैं और इन्हें संजोकर रखना चाहिए। यह बहुत ही प्यारा है।

सफलता की कहानी

बेटा सफल होकर लौटा है यह उसके कपड़ों और चेहरे से साफ झलकता है। लेकिन वह अपने माता-पिता को नहीं भूला। यह सबसे बड़ी सफलता है। गाँव का गौरव की थीम यही है कि जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। यह संदेश बहुत महत्वपूर्ण है। हर युवा को यह देखना चाहिए कि असली दौलत क्या है। बहुत अच्छा संदेश है।

दिल को छू लेने वाला

यह वीडियो देखकर दिल बहुत भारी हो गया लेकिन खुशी से। माता-पिता का इंतजार और बेटे की वापसी सबसे सुंदर कहानी है। गाँव का गौरव जैसे कंटेंट को सपोर्ट करना चाहिए क्योंकि यह समाज को सही रास्ता दिखाता है। अभिनय और कहानी दोनों बहुत ही दमदार हैं। मुझे यह बहुत पसंद आया। सबको देखना चाहिए।