इस नाटक में माँ का दर्द बहुत गहरा दिखाया गया है। वह जमीन पर गिरकर चिल्लाती है और बेटे को कोसती है। गाँव का गौरव नामक इस शो में हर सीन दिल को छू लेता है। बेटे की चुप्पी में भी बहुत कुछ कहने को है। पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं जब वह अतीत को देखता है। यह रिश्ता बहुत जटिल लगता है। कोई आसान समाधान नहीं है।
काले और सफेद दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं। एक छोटा बच्चा इतना बोझ कैसे उठा सकता है। कीचड़ में काम करना आसान नहीं था। गाँव का गौरव में दिखाया गया संघर्ष असली लगता है। उसने अपनी पढ़ाई की पर्ची फाड़ दी जो बहुत दुखद है। माँ की उम्मीदें और बेटे की मजबूरी साफ दिखती हैं। यह कहानी दिल को झकझोर देती है।
लाल चमकदार जूते पहनकर वह नाटक कर रही है या सच में चोट लगी है। लाल जूते बहुत ध्यान खींचते हैं। गाँव का गौरव की कहानी में यह दृश्य बहुत महत्वपूर्ण है। बेटा खड़ा है पर हिल नहीं रहा। माँ मृत दादा की तरफ इशारा करती है। यह भावनात्मक ब्लैकमेलिंग लगती है। दर्शक हैरान रह जाते हैं। यह दृश्य यादगार बन गया है।
बेटे के चेहरे पर पसीना और गुस्सा दोनों हैं। उसने तौलिया गले में डाला है। गाँव का गौरव में किरदार बहुत असली लगते हैं। वह अपनी माँ को देख रहा है पर मदद नहीं कर रहा। शायद उसे लगता है कि यह नाटक है। पुराने घर की दीवारें भी गवाह बन रही हैं। यह कहानी बहुत आगे तक जाती है। सब कुछ स्पष्ट नहीं है।
जब वह ऊपर देखकर चिल्लाती है तो लगता है आसमान फट जाएगा। उसकी आवाज़ में दर्द है या नाटक। गाँव का गौरव में ऐसे सीन बार बार देखे जा सकते हैं। बेटे की आँखों में आँसू नहीं पर कठोरता है। शायद उसने बहुत कुछ सहन किया है। अब वह चुप नहीं रहेगा। यह संघर्ष बहुत गहरा है। हर कोई इससे सहमत होगा।