१९९५ का पुराना कैलेंडर देखकर ही कहानी की शुरुआत बहुत रहस्यमयी तरीके से होती है। नीली सूट वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास देखते ही बनता है और वह बहुत शांत लग रहा था। काले सूट वाले के चेहरे पर पसीना और डर साफ़ दिख रहा था जो कि बहुत अच्छा था। गाँव का गौरव नामक इस कार्यक्रम में ऐसे ही रोमांचक मोड़ देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। कार्यालय का माहौल बहुत तनावपूर्ण था और हर पल कुछ होने वाला था।
अंत में वह बड़ा झोला लेकर जाता है और यह बात बहुत संदेहजनक लग रही थी। काले सूट वाला व्यक्ति क्यों डर गया और उसने क्या देखा था। शायद उसे कोई बड़ा राज़ पता चल गया हो जो उसने छुपाया था। गाँव का गौरव की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है और आगे क्या होगा। अभिनय बहुत ही दमदार था और हर चेहरे के भाव सही जगह पर थे।
नीली सूट वाले की आँखों में एक अलग ही चमक थी जो उसकी ताकत को दिखा रही थी। वह कुर्सी पर ऐसे बैठता है जैसे असली मालिक हो और सब उसकी सुन रहे हों। सामने वाले की हालत खराब हो जाती है और वह कुछ बोल नहीं पाता था। गाँव का गौरव में ऐसे सत्ता का खेल देखना बहुत रोमांचक है और दिलचस्प लगता है। हर भाव मायने रखता है और कहानी आगे बढ़ती है।
वह झोला साधारण नहीं लग रहा था और शायद उसमें कुछ बहुत कीमती चीज़ रखी हुई थी। काले सूट वाले ने दूरभाष चेक किया फिर अचानक घबरा गया और पसीने से तर बतर हो गया। गाँव का गौरव की पटकथा बहुत मज़बूत है और हर दृश्य में नयापन है। दर्शक को बांधे रखने की कला यहाँ दिखती है और लोग पसंद करते हैं। बहुत पसंद आया और बार-बार देखने को मन करता है।
अंत में झुक कर विदाई देना बहुत बड़ी बात है और इसका मतलब साफ़ है। इसका मतलब नीला सूट वाला ऊपर वाले पद पर है और सत्ता उसकी मुट्ठी में है। सत्ता का यह खेल बहुत गहरा है और खतरनाक भी हो सकता है। गाँव का गौरव में ऐसे राजनीतिक संकेत मिलते हैं जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं। कार्यालय की सेटिंग बहुत असली लग रही थी और पुरानी थी।