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गाँव का गौरववां36एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

कर्ज का बोझ

जब उसने बैग से कागजात निकाले तो सन्न रह गई। इतनी बड़ी रकम देखकर किसी का भी होश उड़ जाए। पति की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ देखकर दिल दहल जाता है। असली जिंदगी की समस्याओं को बहुत करीब से दिखाया गया है। हर कोई इस स्थिति में घबरा जाएगा।

गुस्सा और मजबूरी

पत्नी का गुस्सा जायज था, लेकिन पति की मजबूरी भी साफ दिख रही थी। कमरे में रखे लालटेन की रोशनी में तनाव और भी गहरा लग रहा था। गाँव का गौरव की कहानी में यह सीन बहुत अहम है। दोनों के चेहरे के भाव देखकर लगता है कि वे बहुत परेशान हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा ही अलग है।

टूटे हुए सपने

कागजात के बिखरने के साथ ही जैसे उनके सपने भी बिखर गए। वह चिल्ला रही थी और वह बस देखता रहा। यह झगड़ा सिर्फ पैसों का नहीं, भरोसे का था। गाँव का गौरव में ऐसे ड्रामेटिक सीन्स बार-बार देखने को मिलते हैं। अभिनेता ने निराशा को बहुत अच्छे से व्यक्त किया है।

खामोशी का शोर

शुरू में दरवाजा खुलने की आवाज से ही सस्पेंस बन गया था। जब असलियत सामने आई तो कमरे में खामोशी छा गई। पति ने मुंह छुपा लिया, शर्मिंदगी साफ झलक रही थी। गाँव का गौरव की यह एपिसोड बहुत भावुक कर देने वाली है। सेटिंग बहुत पुरानी और असली लग रही थी।

रिश्तों की डोर

मुश्किल वक्त में ही रिश्तों की असली परीक्षा होती है। वह उसे समझाने की कोशिश कर रहा था, पर गुस्सा काबू में नहीं था। गाँव का गौरव में दिखाया गया यह संघर्ष बहुत रिलेटेबल है। कभी-कभी सच्चाई सामने आना ही बेहतर होता है। वीडियो की क्वालिटी भी बहुत अच्छी है।

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