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जब तक फूल न झर जाएँवां63एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सत्ता और प्रेम का टकराव

जब तक फूल न झर जाएँ में राजा की आँखों में छिपी पीड़ा और रानी के चेहरे पर उभरा डर देखकर दिल दहल गया। सैनिकों द्वारा महिला को घसीटने का दृश्य इतना तीव्र था कि साँस रुक गई। लाल पोशाक वाले अधिकारी की कठोरता और पीले वस्त्रों में लिपटे सम्राट की मजबूरी के बीच का संघर्ष वास्तविक लगता है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखते समय लगा जैसे हम स्वयं दरबार में मौजूद हों। भावनाओं का यह तूफान और पात्रों के बीच की खामोश चीखें दर्शकों को बांधे रखती हैं।