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जब तक फूल न झर जाएँवां43एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सत्ता और ममता का टकराव

जब तक फूल न झर जाएँ में महारानी का रौब और माँ का दर्द एक साथ देखकर दिल दहल गया। लाल पोशाक में वो जितनी शाही लगती हैं, उतनी ही टूटी हुई भी। बच्चों को गले लगाते वक्त उनकी आँखों में जो बेबसी थी, वो किसी तख्त से बड़ी थी। बिस्तर पर लेटे सम्राट और दरबारियों की चुप्पी में सियासत की बू आती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर लगता है जैसे इतिहास की किताबें जी उठी हों। हर फ्रेम में तनाव और खूबसूरती का अनोखा मेल है।