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जब तक फूल न झर जाएँवां58एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंधी रानी का रहस्य और राजा की ममता

जब तक फूल न झर जाएँ में दृश्य इतने भावुक हैं कि दिल दहल जाए! आँखों पर पट्टी बांधी रानी का चलना, पीछे से आती सहेली की चालाकी, और फिर राजा का बच्चों के साथ प्यार भरा व्यवहार—सब कुछ जादूई लगता है। बच्चे की उदासी और राजा का सिर सहलाना देखकर आंखें नम हो गईं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना सुकून देता है, जैसे खुद उस महल में खड़े हों। हर फ्रेम में इतनी गहराई है कि बार-बार देखने को मन करता है।