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जब तक फूल न झर जाएँवां15एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजा की आँखों में छिपा दर्द

जब तक फूल न झर जाएँ, इस दृश्य में राजा का चेहरा देखकर दिल दहल गया। गरीब माँ और बच्चों की हालत इतनी दर्दनाक थी कि राजा भी चुपचाप खड़ा रहा। बच्ची का हाथ पकड़कर रोना और माँ का चेहरा ढकना, ये छोटे-छोटे पल इतने भावुक थे कि आँखें नम हो गईं। राजा की आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि असहायता दिखी। ये दृश्य सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि इंसानियत की गहराई को छूता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दिल को छूने वाली है।