जब तक फूल न झर जाएँ का यह दृश्य दिल को छू लेता है। एक परिवार शांति से सो रहा है, लेकिन बाहर का माहौल तनावपूर्ण है। पुरुष और महिला के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही है। अचानक एक आदमी पर्दे के पीछे से झांकता है, और फिर सब कुछ बदल जाता है। बाहर तलवारें और आग का दृश्य देखकर लगता है कि कोई बड़ा संकट आने वाला है। बच्चों की मासूमियत और वयस्कों की चिंता का अंतर बहुत गहरा है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है और अगले पल का इंतजार कराता है।