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जब तक फूल न झर जाएँवां29एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घोड़े की गाड़ी में छुपा खतरा

जब तक फूल न झर जाएँ का यह दृश्य दिल को छू लेता है। एक परिवार शांति से सो रहा है, लेकिन बाहर का माहौल तनावपूर्ण है। पुरुष और महिला के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही है। अचानक एक आदमी पर्दे के पीछे से झांकता है, और फिर सब कुछ बदल जाता है। बाहर तलवारें और आग का दृश्य देखकर लगता है कि कोई बड़ा संकट आने वाला है। बच्चों की मासूमियत और वयस्कों की चिंता का अंतर बहुत गहरा है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है और अगले पल का इंतजार कराता है।