PreviousLater
Close

जब तक फूल न झर जाएँवां39एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

राजसी षड्यंत्र और टूटे दिल की कहानी

जब तक फूल न झर जाएँ में दिखाया गया यह दृश्य सच में रोंगटे खड़े कर देने वाला है! एक तरफ राजसी ठाठ-बाट से सजी रानी माँ का क्रूर चेहरा और दूसरी तरफ बेचारे बच्चों को जबरदस्ती खींचकर ले जाया जाना। जब वे लोग चले गए, तो वह दृश्य जहाँ नायिका अपने घायल प्रेमी को गोद में लिए रो रही है, दिल को चीर देता है। रानी के चेहरे पर आया वह सदमा और डर साफ दिखाता है कि शायद उसने सोचा नहीं था कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे। नेटशॉर्ट ऐप पर यह ड्रामा देखना एक अलग ही अनुभव है, हर पल सस्पेंस बना रहता है!