जब तक फूल न झर जाएँ में रात के दृश्य में आग की लपटें और बच्चों के चेहरे पर डर का भाव दिल को छू लेता है। एक महिला अपने बच्चे को गले लगाए बैठी है, जबकि दो बच्चे सैनिकों के सामने खड़े हैं। राजसी वेशभूषा में महिला और लाल पोशाक में पुरुष की उपस्थिति तनाव बढ़ाती है। बच्चों की मासूमियत और वयस्कों की गंभीरता के बीच का अंतर दर्शनीय है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखकर लगा जैसे इतिहास के पन्ने जीवित हो उठे हों।