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जब तक फूल न झर जाएँवां21एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दिल को छू लेने वाला दृश्य

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य सच में दिल को छू लेता है। पुरुष चरित्र की चिंता और महिला चरित्र की कमजोरी को बहुत ही भावनात्मक ढंग से दिखाया गया है। बच्चों की उपस्थिति और उनकी प्रतिक्रियाएं दृश्य को और भी गहरा बनाती हैं। घोड़े पर सवार होकर जाने का दृश्य रोमांचक लगता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सच में एक अलग अनुभव है।