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जब तक फूल न झर जाएँवां20एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

चट्टान से कूदने का वह पल दिल दहला देने वाला था

जब तक फूल न झर जाएँ में वह दृश्य जहाँ नायक घोड़े से कूदकर नायिका को बचाता है, रोंगटे खड़े कर देने वाला है। चट्टान के किनारे खड़ी वह मासूम बच्ची और घायल माँ की चीखें दिल को चीर देती हैं। विलासिनी महिला की क्रूर मुस्कान और नायक का वह पागलपन भरा सफर देखकर लगता है कि प्रेम की खातिर इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन देखते वक्त सांसें थम सी गई थीं।