जब तक फूल न झर जाएँ का ये सीन दिल को छू गया। बारिश में घुटनों के बल गिरी लड़की की आँखों में वो दर्द था जो शब्दों से बयान नहीं होता। वहीं कमरे में पट्टी बांधे हाथ को सहलाता युवक, उसके चेहरे पर ममता और चिंता का मिश्रण साफ दिख रहा था। बच्ची का पीछे खड़ा होना और सब कुछ चुपचाप देखना मासूमियत की दीवार बन गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखकर लगता है जैसे कहानी हमारे बीच जी रही हो। हर फ्रेम में एक नया एहसास।