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जब तक फूल न झर जाएँवां61एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजसी विवाह में अचानक आया तूफान

जब तक फूल न झर जाएँ का यह दृश्य दिल को छू लेता है। राजा और रानी की शांतिपूर्ण प्रक्रिया में अचानक एक महिला का प्रवेश सब कुछ बदल देता है। उनके चेहरे पर हैरानी और डर साफ दिख रहा है। यह मोड़ दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि आगे क्या होगा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ही रोमांचक दृश्य देखना बहुत अच्छा लगता है।