जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल को छू लेता है। पुरुष का गुस्सा और महिला की आँखों में आँसू, दोनों के बीच का तनाव इतना गहरा है कि साँस रुक जाती है। जब वह घुटनों पर गिरती है, तो लगता है जैसे उसका अहंकार टूट गया हो। पुरुष का चेहरा पत्थर जैसा है, पर आँखों में छिपा दर्द साफ़ दिख रहा है। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि दो दिलों की टूटन है। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी असली ज़िंदगी से जुड़ी है।