जब वह लाल कुर्ता पहने कुर्सी पर बैठी थी, तो उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति थी। जैसे वह जानती हो कि आगे क्या होने वाला है। योद्धा का बदला के इस सीन में तनाव इतना गहरा था कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया। काले कोट वाले शख्स की मुस्कान देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
उसने जब वह पुराना हथियार उठाया, तो लगा जैसे समय थम गया हो। उसकी आँखों में पागलपन और चेहरे पर विजयी मुस्कान। योद्धा का बदला में ऐसा खलनायक कम ही देखा है जो बिना चिल्लाए भी डरा दे। उसके हर इशारे पर पीछे खड़े गुंडे कांप रहे थे।
जब कमरे में धुआं फैला और वह लड़की आँखें बंद किए बैठी रही, तो लगा जैसे कोई जादू हो रहा हो। योद्धा का बदला का यह सीन सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी अनुभव था। धुएं के बीच से निकलती आवाजें और उसकी शांत मुद्रा देखकर मन बेचैन हो गया।
पीछे खड़े सफेद कुर्ता वाले गुंडे जब अचानक घबरा गए, तो लगा जैसे उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया हो। योद्धा का बदला में यह मोड़ बहुत ही दमदार था। मुख्य खलनायक की हंसी और उनके चेहरे पर आया डर देखकर लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
लाल पोशाक वाली लड़की और काले कोट वाला शख्स - यह रंगों का टकराव सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि भावनाओं का युद्ध था। योद्धा का बदला के इस सीन में रंगों का प्रयोग बहुत ही समझदारी से किया गया है। लाल में गर्मी और काले में ठंडक का अहसास होता है।