ग्रे कपड़े वाले योद्धा की शांति देखकर हैरानी हुई। जब सब घबरा रहे थे, वह वहीं खड़ा रहा। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही जान डालते हैं। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, जिम्मेदारी थी। लाल पोशाक वाले दुश्मन की अकड़ देखकर गुस्सा आता है। काश मैं भी ऐसे मुकाबले का हिस्सा होता। युद्ध दृश्य बहुत असली लगे। दर्शक के रूप में मैं पूरी तरह से जुड़ गया था। यह कहानी बहुत आगे तक जाएगी।
सफेद साड़ी वाली महिला का प्रवेश किसी तूफान से कम नहीं था। उसके कदमों में जो वजन था, वह सब कुछ बता रहा था। योद्धा का बदला की कहानी में महिला किरदारों को भी बराबर की ताकत दी गई है। लाल कपड़े वाले सामुराई का घमंड टूटते देख मजा आया। पुराने जमाने के हथियार और उनकी चमक देखने लायक थी। सेटिंग बहुत ही शानदार लगी। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई है।
खून से सनी कमीज वाला दृश्य दिल दहला देने वाला था। दर्द साफ झलक रहा था स्क्रीन पर। योद्धा का बदला में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। लाल पोशाक वाले की हंसी अब भी कानों में गूंज रही है। ऐसा लगता है कि अगला भाग और भी धमाकेदार होगा। सेट डिजाइन बहुत ही शानदार लगा। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है। यह एक बेहतरीन कलाकृति है।
हॉल का नज़ारा बहुत भव्य था। लकड़ी के खंभे और पुरानी संरचना देखकर लगता है कि मेहनत की गई है। योद्धा का बदला की टीम ने लोकेशन चुनने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब तलवारें निकलीं तो सन्नाटा छा गया। हर किसी की सांसें रुकी हुई थीं। ऐसे नाटक आजकल कम ही देखने को मिलते हैं। मुझे यह माहौल बहुत भाया। कलाकारों ने जान डाल दी है।
खलनायक का किरदार इतना नफरत भरा क्यों है? लाल कपड़े वाले की हर हरकत से गुस्सा आता है। योद्धा का बदला में खलनायक भी उतना ही यादगार है जितना नायक। जब वह हंसा तो रोंगटे खड़े हो गए। नायक की चुप्पी सबसे बड़ा हथियार लग रही थी। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आई। टकराव बहुत तीव्र था। देखने वाले को बांधे रखता है।