जब वो काला मुखौटा उतरा और चेहरे पर शैतानी हंसी फैली, तो सच में रोंगटे खड़े हो गए। योद्धा का बदला में ऐसे विलेन ही तो चाहिए जो डराएं भी और हंसाएं भी। उसकी आंखों में छिपी चालाकी और फिर अचानक बदलाव ने सीन को पूरी तरह पलट दिया। दर्शक के रूप में यह अनिश्चितता बहुत रोमांचक लगती है।
नीली पोशाक पहने युवक का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। जब वह चिल्लाता है, तो लगता है जैसे पूरा मैदान गूंज उठा हो। योद्धा का बदला की कहानी में इस किरदार का क्रोध ही सबसे बड़ा हथियार लगता है। उसकी बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव इतने तीखे हैं कि सामने वाले की हिम्मत टूट जाए।
पूरा दृश्य लाल कार्पेट पर सेट है, जो आम तौर पर त्योहारों के लिए होता है, लेकिन यहाँ यह मौत का मंच लग रहा है। योद्धा का बदला में इस कंट्रास्ट का इस्तेमाल बहुत स्मार्ट है। चारों तरफ खड़े लोग और बीच में खड़ा तलवारबाज, सब कुछ एक बड़े विस्फोट की प्रतीक्षा कर रहा है। माहौल में जो तनाव है वह लाजवाब है।
उस सुनहरी मूठ वाली तलवार पर कैमरा जब जूम करता है, तो लगता है जैसे वह किसी पुराने श्राप को छू रही हो। योद्धा का बदला में इस हथियार का महत्व सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं है, यह तो प्रतिष्ठा का प्रतीक लगता है। उस विलेन का उसे पकड़ने का तरीका ही बता रहा है कि वह कितना खतरनाक है।
जब मुख्य विलेन हंस रहा था, तो उसके पीछे खड़े काले लिबास वाले साथी बिल्कुल स्थिर थे। योद्धा का बदला में ये एक्स्ट्रा किरदार भी अपने आप में एक कहानी कह रहे हैं। उनकी खामोशी और गंभीर चेहरे यह संकेत देते हैं कि ये लोग किसी भी आदेश का पालन करने के लिए तैयार हैं। यह डर का माहौल बनाता है।