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Yoddha ka Badla

Arun ka family maara gaya, woh gir ke memory kho baitha aur Radha ke akhaade mein pala. Pandrah saal baad usne traitor Rakesh ko haraya, apni real identity bata di. Radha ne black taabeez ki vidya seekhi. Arun ne dushmano ko defeat karke conspiracy khol di. Aakhir mein dono ne leader ko maar giraya. Sabne Arun ko Sangh ka president chun liya.
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इस एपिसोड की समीक्षा

लाल कालीन पर खूनी संघर्ष

योद्धा का बदला की शुरुआत ही इतनी धमाकेदार होगी, किसी ने सोचा नहीं था। नीली पोशाक वाला योद्धा जब लाल कालीन पर उतरता है, तो हवा में तनाव साफ महसूस होता है। सामने खड़ा गंजा व्यक्ति अपनी तलवार की मूठ पकड़कर हंस रहा है, जैसे उसे जीत का पूरा भरोसा हो। लेकिन असली मजा तो तब आता है जब काले कपड़ों वाला लड़का दस्ताने पहनकर मैदान में कूदता है। उनकी मुक्केबाजी और किकबॉक्सिंग देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि दो अलग-अलग स्कूलों का टकराव है।

एक हाथ से पलटी दुनिया

इस दृश्य में जो एक्शन दिखाया गया है, वह किसी बड़े बजट वाली फिल्म से कम नहीं लगता। योद्धा का बदला में जब नीले सूट वाला शख्स एक हाथ पर खड़ा होकर हमले को रोकता है, तो लगता है जैसे गुरुत्वाकर्षण भी उसकी इज्जत कर रहा हो। सामने वाले के चेहरे पर गुस्सा और हैरानी दोनों साफ दिख रहे हैं। दर्शकों की भीड़ में खड़े लोग भी इस करतब को देखकर दंग रह गए हैं। यह सीन सिर्फ ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि तकनीक और संतुलन का बेहतरीन नमूना है।

पुराने जमाने का बदला

कहानी का माहौल बहुत ही दमदार बनाया गया है। पुरानी इमारतें, लालटेन और पारंपरिक कपड़े देखकर लगता है कि हम किसी और ही दौर में चले गए हैं। योद्धा का बदला में दिखाया गया यह संघर्ष सिर्फ दो लोगों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच है। एक तरफ पारंपरिक कुंग फू है तो दूसरी तरफ आधुनिक फाइटिंग स्टाइल। जब बुजुर्ग दाढ़ी वाला व्यक्ति ऊपर देखकर कुछ कहता है, तो लगता है कि वह किसी पुरानी भविष्यवाणी को याद कर रहा है। यह ड्रामा और एक्शन का बेहतरीन मिश्रण है।

चेहरे के भाव और संवाद

अभिनेताओं के चेहरे के हाव-भाव देखने लायक हैं। खासकर वह व्यक्ति जिसके मुंह से खून बह रहा है, वह दर्द में होने के बावजूद मुस्कुरा रहा है। यह पागलपन या फिर जीत का जूनून? योद्धा का बदला में ऐसे कई पल हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे। नीले सूट वाले लड़के की आंखों में एक अलग ही चमक है, जैसे उसे पता हो कि अंत में जीत उसी की होगी। संवाद कम हैं, लेकिन हर नजर और हर इशारा हजारों शब्दों का काम कर रहा है।

तलवार बनाम मुक्के

जब गंजा योद्धा अपनी तलवार निकालता है, तो माहौल और भी गंभीर हो जाता है। लगता है कि अब मामला हाथापाई से आगे बढ़कर जानलेवा हो सकता है। लेकिन योद्धा का बदला में हीरो बिना किसी हथियार के भी डटा हुआ है। यह साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। तलवार की धार और मुक्कों की ताकत के बीच का यह मुकाबला देखना रोमांचक है। क्या बिना हथियार के लड़ना बहादुरी है या बेवकूफी? यह सवाल हर दर्शक के मन में उठता है।

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