इस दृश्य में बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा साफ तौर पर देखा जा सकता है। लगता है किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत होने वाली है। लाल मंच पर खड़ा होकर वह जो कह रहा है, उसमें बहुत दम है। योद्धा का बदला की कहानी में ऐसा मोड़ आना लाजमी था। आसपास खड़े लोग भी तनाव महसूस कर रहे हैं। यह मुकाबला सिर्फ ताकत का नहीं, इज्जत का भी लगता है। देखने वालों की सांसें थमी हुई हैं और सबकी नजरें एक ही जगह टिकी हैं और कोई हिल नहीं रहा है।
नीली पोशाक वाला युवक बहुत शांत है। उसे देखकर लगता नहीं कि वह डरा हुआ है। शायद उसे अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा है। बुजुर्ग की चुनौती को वह मुस्कुराहट से ले रहा है। इस शो योद्धा का बदला में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। पीछे खड़े लोग भी कुछ गुप्त योजना बना रहे लगते हैं। माहौल में जो चुप्पी है, वह शोर से ज्यादा डरावनी है। हर कोई अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
काले कपड़े वाला व्यक्ति बहुत रहस्यमयी लग रहा है। उसकी आंखों में कुछ और ही बात है। वह सब कुछ देख रहा है लेकिन चुप है। शायद वह असली खिलाड़ी है। सेट डिजाइन बहुत पुराने जमाने का है, जो कहानी को असली बनाता है। योद्धा का बदला का यह एपिसोड बहुत रोमांचक है। लालटेन और लकड़ी की बनावट देखने लायक है। हर कोने पर एक नया राज छिपा है जो धीरे धीरे खुल रहा है।
यह लड़ाई सिर्फ मुक्कों की नहीं, दिमाग की भी है। बुजुर्ग की आवाज में दर्द और गुस्सा दोनों हैं। युवक की खामोशी सबसे बड़ा जवाब है। दर्शक के रूप में मैं इस कहानी में खो गया हूं। योद्धा का बदला ने मेरी उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते नहीं हैं। हर एक्टर ने अपना किरदार बहुत अच्छे से निभाया है। यह कला का बेहतरीन नमूना है।
मंच के चारों ओर खड़े लोग भी इस नाटक का हिस्सा हैं। किसी के हाथ में हथियार हैं, तो कोई बस देख रहा है। यह साबित करता है कि खतरा कितना गंभीर है। बुजुर्ग की हरकतें बता रही हैं कि वह हार नहीं मानेगा। योद्धा का बदला की रफ्तार बहुत तेज है। मुझे नहीं पता था कि कहानी इस मोड़ पर जाएगी। अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता है। हर पल नया रहस्य है।