जब लड़ाई चल रही थी, तभी एक आदमी ने छुपकर सुई से हमला कर दिया। यह दृश्य योद्धा का बदला में बहुत ही चौंकाने वाला था। दर्शकों के रूप में हमें लगा कि यह अन्याय है, लेकिन कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। पात्रों के चेहरे के भाव देखकर लगता है कि वे सच में हैरान हैं।
लाल पट्टी पहने हुए योद्धा का जोश देखते ही बनता है। वह कैसे जमीन से उठता है और फिर से लड़ने के लिए तैयार होता है, यह दृश्य योद्धा का बदला की सबसे यादगार पलों में से एक है। उसकी आंखों में गुस्सा और जिद्द साफ दिखाई दे रही थी।
नीले कोट वाले पात्र की शांति और धैर्य देखकर लगता है कि वह किसी बड़ी योजना पर काम कर रहा है। योद्धा का बदला में उसका किरदार बहुत गहरा है। वह बिना बोले ही सब कुछ समझ जाता है और सही समय पर सही कदम उठाता है।
तलवार लेकर खड़ा वह सन्यासी बहुत ही रहस्यमयी लग रहा था। योद्धा का बदला में उसका प्रवेश कहानी में नया मोड़ लाता है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वह कुछ बड़ा करने वाला हो।
लड़ाई के दौरान भीड़ की प्रतिक्रियाएं बहुत ही असली लग रही थीं। योद्धा का बदला में हर पात्र का अपना महत्व है। कुछ डरे हुए थे, तो कुछ उत्साहित। यह दृश्य दर्शकों को कहानी में बांधे रखता है।