जब उस छोटे बच्चे को कुर्सी पर बांधा गया, तो मेरा दिल रुक सा गया। वही है वो, बॉस! वाली फीलिंग आई जब चाकू उठाया गया। मां का गुस्सा और पुलिस का एंट्री टाइमिंग परफेक्ट था। हर सीन में टेंशन बढ़ती गई, खासकर जब शीशा टूटा।
लेदर जैकेट वाली महिला का गुस्सा देखकर लगता है जैसे वो खुद एक्शन फिल्म की हीरोइन हो। वही है वो, बॉस! वाला डायलॉग मन में आया जब उसने चाकू पकड़े आदमी को डांटा। बच्चे को बचाने की जद्दोजहद में उसकी आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे।
जब पुलिस वाले ने शीशा तोड़कर एंट्री ली, तो पूरा सीन ही बदल गया। वही है वो, बॉस! वाली एनर्जी थी उस पल में। ब्लू यूनिफॉर्म में वो कितने सीरियस लग रहे थे। बच्चे को बचाने के लिए उनकी तैयारी देखकर लगता है कि ये सिर्फ ड्रामा नहीं, असली एक्शन है।
जब उस आदमी ने चाकू उठाया, तो मेरी सांसें रुक गईं। वही है वो, बॉस! वाला मोमेंट था जब खतरा सबसे ज्यादा था। बच्चे की आंखों में डर और मां की बेचैनी देखकर लगता है कि ये सिर्फ एक सीन नहीं, असली खतरा है। हर सेकंड टेंशन से भरा हुआ था।
उस छोटे बच्चे की आंखों में जो डर था, वो किसी भी एक्शन सीन से ज्यादा असरदार था। वही है वो, बॉस! वाली फीलिंग आई जब वो रोने लगा। उसकी मासूमियत देखकर लगता है कि ये कहानी सिर्फ एक्शन नहीं, इमोशन भी है। हर पल दिल को छू जाता है।