बारिश की बूंदों के बीच एक अजीब सी खामोशी है जब वो सुनहरे बालों वाला आदमी फोन पर बात करता है। उसकी आँखों में चिंता है, जैसे कोई बड़ा फैसला लेना हो। वही है वो, मालिक! जो सब कुछ संभाल रहा है। महिला और बच्चे की मुस्कान भी अब धुंधली लग रही है।
एक तरफ बारिश में भीगता हुआ आदमी, दूसरी तरफ वातानुकूलित कार्यालय में गुस्से में बात करता हुआ दूसरा आदमी। दोनों के बीच क्या संबंध है? वही है वो, मालिक! जो दोनों दुनियाओं को जोड़ रहा है। हर दृश्य में तनाव बढ़ता जा रहा है।
पारदर्शी छाते के नीचे छुपी हुई सच्चाई क्या है? वो आदमी जो बारिश में खड़ा है, उसकी आवाज़ में डर है या गुस्सा? वही है वो, मालिक! जो सब कुछ जानता है। महिला की चुप्पी और बच्चे की मासूमियत भी अब सवाल बन गई है।
हर फोन कॉल के पीछे एक कहानी होती है। यहाँ दो आदमी एक दूसरे से बात कर रहे हैं, लेकिन उनके चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं। वही है वो, मालिक! जो सब कुछ नियंत्रण कर रहा है। बारिश का मौसम भी उनके नाटक का हिस्सा बन गया है।
बच्चा बारिश में भीग रहा है, लेकिन उसकी आँखों में सवाल हैं। वो समझ नहीं पा रहा कि बड़े लोग क्यों इतने गंभीर हैं। वही है वो, मालिक! जो सब कुछ संभाल रहा है। महिला की मुस्कान भी अब झूठी लग रही है।