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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

ऑफिस का वो पल

ऑफिस के ग्लास रूम में जब वो दोनों करीब आए, तो हवा भी रुक सी गई। उसकी आँखों में डर था, पर दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। वही है वो, बॉस! वाला मोमेंट जब सब कुछ भूलकर बस एक दूसरे में खो गए। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है जैसे खुद उस कमरे में खड़े हों।

बच्चे की मासूमियत

कार में बैठा वो छोटा सा लड़का जब नीले बॉक्स को खोलता है, तो उसकी आँखों में चमक देखकर दिल पिघल जाता है। शायद वो अंगूठी किसी खास के लिए है? वही है वो, बॉस! वाली फीलिंग जब बच्चे की मासूमियत बड़ों के जटिल रिश्तों को भी सरल बना दे। नेटशॉर्ट पर ऐसे पल देखना सुकून देता है।

चुप्पी की ताकत

कभी-कभी शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है। जब वो दोनों ऑफिस में खड़े थे, तो बिना कुछ कहे ही सब कुछ कह गए। वही है वो, बॉस! वाला सीन जब आँखें दिल की बातें बयां कर रही थीं। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि प्यार की भाषा तो बस यही है।

गले मिलने का अहसास

जब उसने उसे गले लगाया, तो लगा जैसे समय थम गया हो। उसकी आँखें बंद थीं, पर चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था। वही है वो, बॉस! वाला पल जब दुनिया की सारी चिंताएं गायब हो गईं। नेटशॉर्ट पर ऐसे मोमेंट्स देखकर लगता है कि प्यार में बस यही पल मायने रखते हैं।

कार की यात्रा

कार में बैठे हुए जब वो दोनों चुपचाप एक दूसरे के पास बैठे थे, तो लगा जैसे वो सफर कभी खत्म न हो। वही है वो, बॉस! वाली फीलिंग जब रास्ते नहीं, बस साथ मायने रखता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि कुछ सफर मंजिल से ज्यादा खूबसूरत होते हैं।

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