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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चे की मासूमियत ने जीता दिल

इस दृश्य में छोटे लड़के की मासूमियत और उसकी आँखों में छिपी जिज्ञासा देखकर दिल पिघल गया। वही है वो, बॉस! जब वह दूध का गिलास पकड़कर बैठता है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़े रहस्य को सुलझा रहा हो। उसकी हर हरकत में एक अलग ही जादू है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

सूट वाले शख्स का रहस्यमयी अंदाज

सूट पहने उस शख्स का अंदाज इतना रहस्यमयी है कि हर पल लगता है वह कुछ छिपा रहा है। वही है वो, बॉस! जब वह लड़के की तरफ देखता है, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक होती है। शायद वह लड़के के पिता हैं या फिर कोई और रिश्ता? यह सस्पेंस दर्शकों को बांधे रखता है।

लड़की की एंट्री ने बदला माहौल

जैसे ही लड़की कमरे में एंट्री करती है, पूरा माहौल बदल जाता है। वही है वो, बॉस! उसकी सफेद शर्ट और भूरे स्कर्ट का कॉम्बिनेशन इतना क्लासी लगता है कि नजरें हटती ही नहीं। जब वह टेबल पर बैठती है, तो लगता है जैसे कोई नया ट्विस्ट आने वाला हो।

तीनों के बीच की केमिस्ट्री

इन तीनों के बीच की केमिस्ट्री इतनी नेचुरल है कि लगता है जैसे वे असल जिंदगी में भी ऐसे ही हों। वही है वो, बॉस! लड़का, सूट वाला शख्स और लड़की - तीनों के बीच एक अदृश्य धागा बंधा हुआ है जो कहानी को आगे बढ़ाता है। हर डायलॉग और हर लुक में एक गहराई है।

रेस्तरां का सेटिंग और एटमॉस्फियर

रेस्तरां का सेटिंग इतना वार्म और इनविटिंग है कि लगता है जैसे आप भी वहीं बैठे हों। वही है वो, बॉस! पीले दीवारें, हरे कुशन और धीमी रोशनी - सब कुछ इतना परफेक्ट है कि कहानी और भी रियल लगती है। यह सेटिंग कहानी के इमोशन्स को और भी गहरा कर देती है।

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