शुरुआत में लगा कि यह एक सुकून भरा पारिवारिक पिकनिक है, लेकिन जैसे ही वो फोन पर बात करने लगा, माहौल बदल गया। महिला की नजरें और बच्चे का ध्यान भटकना सब कुछ बता रहा था। लगता है यह मिलना सिर्फ बातचीत के लिए नहीं, बल्कि किसी पुरानी कड़वी सच्चाई को सुलझाने के लिए था। वही है वो, बॉस! में दिखाया गया तनाव हर सीन में महसूस किया जा सकता है।
बाहर चल रही गंभीर बातचीत के बीच, अंदर नौकरानियों का सीन बहुत दिलचस्प था। वे फोन में किसी की तस्वीर देखकर हैरान हैं, और तभी बॉस की एंट्री होती है। उनका डरना और बॉस का गुस्सा साफ जाहिर करता है कि घर के अंदर भी कुछ गड़बड़ चल रही है। यह ड्रामा सिर्फ बाहर ही नहीं, अंदर भी चल रहा है। वही है वो, बॉस! की कहानी हर मोड़ पर चौंकाने वाली है।
महिला ने जब फोन में वह तस्वीर दिखाई, तो पुरुष का चेहरा देखने लायक था। वह तस्वीर किसकी थी और उसका इस पिकनिक से क्या लेना-देना है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई। शायद यही वह वजह है जिसके लिए यह मिलना जरूरी था। वही है वो, बॉस! में हर छोटी चीज बड़े प्लॉट का हिस्सा लगती है।
जब बॉस ने नौकरानियों को फोन देखते हुए पकड़ा, तो उनका चेहरा देखने लायक था। उनका गुस्सा और नौकरानियों का डर साफ दिखाता है कि वह तस्वीर कोई मामूली बात नहीं है। लगता है घर में चल रही यह चर्चा बाहर की बातचीत से ज्यादा खतरनाक है। वही है वो, बॉस! में हर किरदार की अपनी एक कहानी है।
पूरे तनाव के बीच, बच्चे की मासूमियत सबसे अलग थी। वह न तो बातचीत में शामिल था और न ही तनाव को समझ पा रहा था। उसकी मौजूदगी इस गंभीर माहौल में एक अलग ही रंग भर रही थी। शायद वही एकमात्र है जो इस सब से अनजान है। वही है वो, बॉस! में बच्चों का किरदार भी बहुत अहम है।