इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। वह लड़का जो सोफे पर बैठा है, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है जो डराती है। जब वह उंगली उठाकर इशारा करता है, तो लगता है जैसे उसने किसी की किस्मत का फैसला कर दिया हो। वही है वो, बॉस! लड़की की बेबसी और उस बूढ़े आदमी की मजबूरी देखकर दिल दहल जाता है। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि सत्ता का प्रदर्शन है जहां एक तरफ ताकत है और दूसरी तरफ सिर्फ आंसू।
लाल रंग की पोशाक पहने वह लड़की इस पूरे दृश्य में सबसे ज्यादा दर्दनाक लग रही है। उसकी आंखों में जो डर और गुस्सा है, वह साफ दिखाई दे रहा है। जब वह जमीन पर गिरती है और फिर उठने की कोशिश करती है, तो लगता है जैसे उसकी आत्मा टूट रही हो। वही है वो, बॉस! उस बूढ़े नौकर का हाथ पकड़ना और उस सुनहरे बालों वाले लड़के की बेरुखी देखकर गुस्सा आता है। यह दृश्य बताता है कि कैसे पैसा और ताकत इंसानियत को कुचल सकती है।
कभी-कभी शोर से ज्यादा डरावनी खामोशी होती है। वह लड़का बिना कुछ बोले, बस अपनी उंगली हिलाकर सबको कंट्रोल कर रहा है। उसकी चुप्पी में एक खतरनाक आदेश छिपा है। वही है वो, बॉस! लड़की चिल्ला रही है, रो रही है, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी जा रही। यह दृश्य दिखाता है कि जब कोई इंसान दूसरे को इंसान समझना बंद कर देता है, तो क्या हालत होती है। उस लड़की की चीखें दीवारों से टकराकर वापस आ रही हैं।
सबकी नजरें उस लड़के और लड़की पर हैं, लेकिन मुझे उस बूढ़े नौकर पर तरस आ रहा है। वह जानता है कि अगर उसने लड़की को पकड़ा नहीं, तो उसकी नौकरी चली जाएगी। वही है वो, बॉस! उसकी आंखों में जो मजबूरी है, वह साफ पढ़ी जा सकती है। वह लड़की को पकड़कर खुश नहीं है, बल्कि मजबूर है। यह तिकोना संघर्ष इस दृश्य को और भी गहरा बना देता है। हर किसी की अपनी मजबूरी है, लेकिन असली दर्द उसका है जो पिस रहा है।
वह सुनहरे बालों वाला लड़का सोफे पर ऐसे बैठा है जैसे वह इस कमरे का राजा हो। उसकी पोशाक, उसका अंदाज, सब कुछ यह बता रहा है कि उसे अपनी ताकत पर घमंड है। वही है वो, बॉस! जब वह लड़की को नीचे गिराकर देखता है, तो उसके चेहरे पर जरा भी दया नहीं है। यह अहंकार कहीं न कहीं उसकी बर्बादी का कारण बनेगा। यह दृश्य अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को बहुत खूबसूरती से दिखाता है।