जब वो छोटा सा लड़का अचानक हंस पड़ा, तो लगता है जैसे पूरा माहौल हल्का हो गया। उसकी मासूमियत ने शायद उस औरत के दिल को पिघला दिया जो पहले नाराज़ लग रही थी। बच्चे की ये अदा देखकर लगता है कि वही है वो, बॉस! जो सबको जोड़ सकता है। कार में बैठकर दादी का चेहरा देखकर लगता है कि वो भी इस पल को संभालना चाहती हैं।
उस आदमी के हाथ में वो नीला डिब्बा देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला था, लेकिन फिर भी सब कुछ अधूरा सा लगा। शायद वो प्रपोज़ करने वाला था, लेकिन बच्चे की हंसी ने सब कुछ बदल दिया। वही है वो, बॉस! जब दिल की बातें शब्दों से ज्यादा मायने रखती हैं। कार में बैठकर सबकी चुप्पी भी कुछ कह रही थी।
दादी का चेहरा देखकर लगता है कि वो सब कुछ समझ रही हैं, लेकिन फिर भी चुप हैं। शायद वो इस रिश्ते को बचाना चाहती हैं, या फिर बच्चे के भविष्य के बारे में सोच रही हैं। वही है वो, बॉस! जब बुजुर्गों की आंखें सब कुछ देख लेती हैं। कार में बैठकर उनकी हर हरकत में एक कहानी छिपी थी।
उस औरत की आंखों में जो दर्द था, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। शायद वो इस रिश्ते से थक चुकी थी, या फिर बच्चे के लिए सब कुछ सहन कर रही थी। वही है वो, बॉस! जब मां का दिल सबसे ज्यादा दर्द सहता है। कार में बैठकर उसकी चुप्पी भी चीख रही थी।
जब बच्चा हंसा, तो सबकी चुप्पी टूट गई। शायद वो हंसी सबके लिए एक संदेश थी कि जिंदगी में खुशियां भी हैं। वही है वो, बॉस! जब एक छोटी सी हंसी सब कुछ बदल दे। कार में बैठकर सबकी आंखों में एक नई उम्मीद दिखी।