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वही है वो, बॉस!

छह साल पहले, एक रात ने दीना की ज़िंदगी बदल दी — वह एक अकेली माँ बन गई। उसे कभी पता नहीं चला कि उस रात का वह आदमी एलेक्स था, जो एक्लाट ग्रुप का सीईओ है, और वह तब से उसे ढूंढ रहा है। उसकी साजिशी सौतेली बहन उसकी जगह ले लेती है, दीना की पहचान चुरा लेती है। किस्मत दीना को एक्लाट ग्रुप में एलेक्स की सेक्रेटरी बनाकर ले आती है, जहाँ प्यार फिर से खिल उठता है...
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चे की मासूमियत ने जीता दिल

इस दृश्य में छोटे बच्चे की मासूमियत और उसकी बातें देखकर दिल पिघल गया। वही है वो, बॉस! जब वह खाने की तारीफ करता है तो लगता है जैसे सब कुछ ठीक हो गया। बड़े लोगों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति में उसकी हंसी सबसे बड़ी राहत है।

खाने का प्यार और रिश्तों की मिठास

खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने के लिए भी होता है। वही है वो, बॉस! जब वह महिला स्पेगेटी लेकर आती है और सब साथ बैठकर खाते हैं, तो लगता है जैसे एक नई शुरुआत हो रही हो। खाने की खुशबू ने सबके चेहरे पर मुस्कान ला दी।

तनाव के बीच भी उम्मीद की किरण

शुरुआत में सब कुछ तनावपूर्ण लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे माहौल बदलता गया। वही है वो, बॉस! जब बूढ़े आदमी ने गुस्से में कुछ कहा, तो लगा कि सब खत्म हो गया, लेकिन फिर बच्चे की बात ने सबको हंसा दिया। यह दिखाता है कि उम्मीद कभी नहीं मरती।

पारिवारिक झगड़े और सुलह

परिवार में झगड़े तो होते ही हैं, लेकिन सुलह भी होती है। वही है वो, बॉस! जब वह युवक और युवती एक-दूसरे को देखते हैं, तो लगता है जैसे उनके बीच कुछ अनकहा है। बच्चे की मौजूदगी ने सबको एक साथ ला दिया और झगड़े भूल गए।

खाने की तारीफ और दिल की बात

खाना इतना स्वादिष्ट था कि सबने तारीफ की। वही है वो, बॉस! जब बच्चे ने कहा कि यह सबसे अच्छा खाना है, तो सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई। खाने ने न सिर्फ पेट भरा, बल्कि दिल भी जीत लिया। यह दृश्य बहुत ही दिल को छू लेने वाला था।

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