अस्पताल के दृश्य में जो तनाव दिखाया गया है वह दिल को छू लेता है। बूढ़ी महिला की चिंता और युवक का आक्रामक रवैया कहानी को रोचक बनाता है। वही है वो, साहब! जैसे ही परिचारिका और अन्य लोग बीच में आते हैं, स्थिति और भी जटिल हो जाती है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है और आगे की कहानी के लिए उत्सुक बढ़ाता है।
महल जैसे घर में बच्चे का खानसामा की पीठ पर चढ़ना एक मजेदार दृश्य है। खानसामा की मजबूरी और महिला की मुस्कान इस दृश्य को हल्का-फुल्का बनाती है। वही है वो, साहब! यह दृश्य दिखाता है कि कैसे अमीर घरों में भी बच्चों की शरारतें चलती हैं। खानसामा का धैर्य और बच्चे की जिद्द देखकर हंसी आती है।
सुनहरे बालों वाले युवक का फोन पर बातचीत करना और उसका गंभीर चेहरा कहानी में रहस्य जोड़ता है। वही है वो, साहब! उसकी बातचीत से लगता है कि कोई बड़ी समस्या चल रही है। उसकी पश्चिमी पोशाक उसकी अमीरी को दर्शाती है। यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर बात क्या है।
कार्यालय का दृश्य बहुत आधुनिक और सुव्यवस्थित दिखाया गया है। महिला और बच्चे का कार्यालय में आना और दूसरी महिला से बातचीत करना दिलचस्प है। वही है वो, साहब! कार्यालय का माहौल और कर्मचारियों का व्यवहार पेशेवर लगता है। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे काम की जगह पर भी पारिवारिक मुद्दे आ सकते हैं।
बच्चे का टैबलेट पर कृत्रिम बुद्धि द्वारा निर्मित तस्वीर देखना एक आधुनिक तकनीक का उपयोग है। वही है वो, साहब! बच्चे का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ गहराई से सोच रहा है। यह दृश्य तकनीक और बच्चों के बीच के संबंध को दर्शाता है। कृत्रिम बुद्धि का उपयोग कहानी को आगे बढ़ाता है और दर्शकों को हैरान करता है।