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(डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ोवां39एपिसोड

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(डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो

बीते लम्हों को फिर से जीने के लिए, मैरी अपने याददाश्त खो चुके पति के साथ एक टूर पर निकलती है। लेकिन पहचान में एक छोटी-सी गलती, टूर गाइड की बेरुखी और बेइज़्ज़ती में बदल जाती है। जब सच्चाई सामने आती है, तो वही गाइड अपने किए पर पछतावे और बर्बादी के अंधेरे में डूब जाता है—और उधर, मैरी और उसका पति एक बार फिर अपनी खोई हुई मोहब्बत की मिठास को पा लेते हैं।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गलतफहमी का धमाका

जब अमीर परिवार की पहचान छिपी हो और गरीब समझकर बेइज्जती कर दी जाए, तो बदला कितना खतरनाक होता है यह (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में साफ दिखता है। हॉस्पिटल का वो सीन जहाँ वसीम अपना वॉलेट दिखाता है और सबकी सांसें रुक जाती हैं, वो सिनेमा का जादू है। चेहरे के रंग बदलना और डर के मारे कांपना, एक्टिंग कमाल की है।

अहंकार का अंत

उस लड़की का घमंड देखकर चिढ़ होती थी, लेकिन जब सच सामने आया तो उसका चेहरा देखने लायक था। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो की कहानी हमें सिखाती है कि किसी को उसकी पोशाक से नहीं पहचानना चाहिए। उमेश चौहान जैसे महान इंसान को मारना और फिर उनकी असली पहचान जानकर पछताना, ये इमोशनल रोलरकोस्टर है।

बदले की आग

जब गुस्सा खून में दौड़ता है तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। वसीम का गुस्सा और उसकी माँ का ठंडा रवैया, दोनों का कॉम्बिनेशन खतरनाक है। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में दिखाया गया है कि कैसे एक गलतफहमी पूरे परिवार की जिंदगी बर्बाद कर सकती है। वो पल जब सच सामने आता है, रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

पहचान का खेल

कभी-कभी सच इतना कड़वा होता है कि उसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है। इस शो में दिखाया गया है कि कैसे अमीर बाप को गरीब समझकर पीटा गया और फिर जब सच पता चला तो सब सन्न रह गए। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो का हर एपिसोड नया ट्विस्ट लाता है। वसीम की आँखों में वो गुस्सा देखकर डर लगता है।

माँ का तेवर

उस बुजुर्ग महिला का कैरेक्टर सबसे दमदार है। शांत रहकर भी वो सबको डरा देती हैं। जब वो कहती हैं कि 'तुमने मेरे परिवार को टार्चर किया', तो दिल दहल जाता है। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में पावर डायनामिक्स बहुत अच्छे दिखाए गए हैं। अमीर होने का घमंड तोड़ना ही इस कहानी का मकसद लगता है।

सच का सामना

झूठ बोलने वालों का अंत हमेशा बुरा होता है, यह कहावत इस शो में चरितार्थ होती है। जब वसीम फोटो दिखाता है, तो उन लोगों के चेहरे पर जो डर था, वो लाजवाब था। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत है। हर डायलॉग सीधा दिल पर वार करता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट देखना सुकून देता है।

गलती की सजा

इंसान को अपनी गलती का अहसास तब होता है जब बहुत देर हो चुकी होती है। उन तीनों का पछतावा देखकर लगता है कि अब इनकी जिंदगी खत्म हो गई। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में दिखाया गया न्याय बहुत संतोषजनक है। वसीम का 'वासीम, इन्हें ले जाओ' वाला डायलॉग रोंगटे खड़े कर देता है। क्लासिक रिवेंज ड्रामा।

रिश्तों की कीमत

पैसे और पावर के आगे रिश्ते भी फीके पड़ जाते हैं, लेकिन जब असली ताकतवर सामने आ जाए तो सबकी बोलती बंद हो जाती है। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में फैमिली वैल्यूज और इज्जत का मुद्दा बहुत गहराई से उठाया गया है। उमेश चौहान का कैरेक्टर बहुत इमोशनल है, उन्हें मारना किसी को बर्दाश्त नहीं होगा।

डर का साया

जब आपको पता चले कि आपने जिस व्यक्ति को मारा है वो शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन है, तो हालत क्या होगी? यही हालत उन लोगों की है। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो का सस्पेंस बना हुआ है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज देखना मेरा दिन बनाने वाला काम है। एक्टिंग और डायरेक्शन दोनों शानदार हैं।

अंतिम चेतावनी

वसीम की आखिरी चेतावनी कि 'मैं दोबारा इनकी शक्ल नहीं देखना चाहता', उन लोगों के लिए मौत से कम नहीं थी। (डबिंग) अरबपति के माता-पिता मत छेड़ो में दिखाया गया क्लाइमेक्स बहुत दमदार है। गलतफहमी हो सकती है लेकिन अहंकार इंसान को अंधा कर देता है। यह शो हर किसी को देखना चाहिए जो दूसरों को जज करता है।