जब गेरी और युवक किचन में पाइप ठीक करने की कोशिश करते हैं, तो अचानक खून की बूंदें दिखाई देती हैं। यह दृश्य बहुत ही चौंकाने वाला था। युवक के हाथ से खून बह रहा था और गेरी का चेहरा डर से सफेद पड़ गया। लगता है अब देर हो गई और कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है।
गेरी का व्यवहार बहुत ही संदिग्ध लग रहा है। खाने की मेज पर वह सामान्य बनने की कोशिश करता है, लेकिन किचन में उसका असली रूप सामने आ जाता है। जब युवक चोटिल होता है, तो गेरी की प्रतिक्रिया से लगता है कि वह कुछ छिपा रहा है। अब देर हो गई, सच सामने आने ही वाला है।
बेटी के चेहरे के भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। वह अपने पिता गेरी पर भरोसा नहीं कर पा रही है। जब वह दरवाजा खोलती है और बाहर किसी को देखती है, तो उसका डर साफ़ झलकता है। लगता है कि अब देर हो गई और परिवार का राज़ खुलने वाला है। यह कहानी बहुत ही रोचक मोड़ ले रही है।
एक तरफ त्योहार जैसा माहौल है और टेबल पर टर्की रखी है, वहीं दूसरी तरफ किचन में खून बह रहा है। यह विरोधाभास बहुत ही अच्छे से दिखाया गया है। गेरी की मुस्कान के पीछे का डर और युवक की पीड़ा दर्शनीय है। अब देर हो गई, यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
किचन के सिंक के नीचे जो पाइप था, उससे खून टपक रहा था। यह दृश्य बहुत ही डरावना था। गेरी और युवक दोनों ही इस स्थिति से घबराए हुए लग रहे थे। लगता है कि अब देर हो गई और कोई बड़ी गलती हो चुकी है। यह छोटा सा विवरण पूरी कहानी को एक नया आयाम देता है।