सिमरन का किरदार बहुत गहरा है। वह गई, बर्फ़ गिरी में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। जब वह रुद्र के सामने खड़ी होती है तो लगता है जैसे वह चीखना चाहती हो पर आवाज नहीं निकल रही। दादी द्वारा दिए गए शादी के कागजात और उसका खामोश चेहरा बता रहा था कि वह फंस चुकी है। रुद्र का व्यवहार भी अजीब था, कभी पास आता है तो कभी दूर चला जाता है। यह कहानी दिल को छू लेती है।
दादी का किरदार इस कहानी की रीढ़ है। वह गई, बर्फ़ गिरी में उनकी सख्ती और अधिकार का अहसास हर सीन में होता है। जब वह सिमरन को शादी का करार देती हैं तो लगता है जैसे कोई फैसला सुना दिया गया हो। सिमरन का हल्का नीला सूट और दादी की पुरानी शैली का कंट्रास्ट बहुत अच्छा लगा। रुद्र भी दादी के सामने बेबस लग रहा था। नेटशॉर्ट पर ऐसे परिवारिक ड्रामा देखना बहुत पसंद आता है।
दीवार पर लगी उस लड़की की तस्वीर ने कहानी में नया मोड़ दे दिया। वह गई, बर्फ़ गिरी में यह तस्वीर रुद्र और सिमरन के बीच की दूरी को और बढ़ा देती है। जब रुद्र उस तस्वीर को देखता है तो उसकी आँखों में कुछ और ही भाव होते हैं। सिमरन को यह सब देखकर कितना दर्द हुआ होगा, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। यह सस्पेंस बनाए रखता है कि आखिर वह तस्वीर वाली लड़की कौन है।
बेडरूम का वह सीन जहां रुद्र और सिमरन बिस्तर पर होते हैं, वहां का सन्नाटा बहुत भारी था। वह गई, बर्फ़ गिरी के इस हिस्से में शब्दों की जरूरत नहीं थी, बस आँखों की बात चल रही थी। सिमरन का रोना और रुद्र का उसे सहलाना दिखाता है कि दोनों के बीच प्यार है पर हालात अलग हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर लगता है कि कहानी बहुत गहरी है। हर एक्टर ने अपना किरदार बहुत अच्छे से निभाया है।
लाल रंग का वह लिफाफा जिस पर शादी का करार लिखा था, वह सिमरन के लिए किसी सजा से कम नहीं था। वह गई, बर्फ़ गिरी में यह सीन बहुत अहम है क्योंकि यहीं से सिमरन की असली परीक्षा शुरू होती है। दादी का उसे वह कागज देना और सिमरन का उसे पकड़ना दिखाता है कि अब वह इस खेल का हिस्सा बन चुकी है। रुद्र ग्रुप का वारिस होने का बोझ रुद्र पर भी साफ दिख रहा था।