आमतौर पर दुल्हन सफेद या लाल पहनती है, लेकिन यहाँ काली चमकदार साड़ी पहनी लड़की का स्टेटमेंट बहुत स्ट्रॉन्ग है। उसका चेहरा बता रहा है कि वह किसी धोखे या गलतफहमी से जूझ रही है। जब वह खड़ी होती है और नीचे देखती है, तो उसकी बॉडी लैंग्वेज चीख-चीख कर कह रही है कि अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा। वह गई, बर्फ़ गिरी वाली फीलिंग इस ड्रामे में साफ दिखती है।
जब दूसरा लड़का आकर घुटनों पर बैठे शख्स को पकड़ता है और गुस्से में उसे झकझोरता है, तो सीन में एक नया मोड़ आ जाता है। यह सिर्फ दो प्रेमियों की कहानी नहीं है, बल्कि यहाँ दोस्तों की वफादारी और गुस्सा भी शामिल है। उसकी आँखों में जो आक्रोश है, वह साबित करता है कि वह इस लड़की की इज्जत के लिए लड़ रहा है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे ठंडे माहौल में आग लग गई है।
पीछे खड़ी बुजुर्ग महिला, जो शायद दादी हैं, उनका चेहरा देखकर लगता है कि वे इस सब से टूट गई हैं। उनकी लाठी और पारंपरिक कपड़े इस आधुनिक ड्रामे के बीच एक पुरानी पीढ़ी की मजबूरी को दर्शाते हैं। वे बस खड़ी होकर देख रही हैं, शायद उन्हें लग रहा है कि परिवार की इज्जत धूल में मिल रही है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे माहौल में उनकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है।
जो लड़का घुटनों पर है और चश्मा पहने है, उसके चेहरे पर सिर्फ शर्म नहीं, बल्कि एक गहरी पीड़ा भी है। वह कुछ बोलना चाहता है लेकिन शब्द गले में अटक रहे हैं। जब वह उठता है और लड़की से बात करने की कोशिश करता है, तो लगता है कि वह माफी मांग रहा है या कोई सफाई दे रहा है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे ठंडे पलों में उसकी आँखें नम हैं।
पूरा सेटअप शादी का है, पीछे लाल 'डबल हैप्पीनेस' का निशान है, लेकिन माहौल में खुशी की जगह गम और गुस्सा है। लाल गुब्बारे और सजावट इस उदास सीन के साथ एक अजीब सा कंट्रास्ट बना रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे एक खुशियों का त्योहार अचानक एक अदालत में बदल गया हो जहाँ सब एक-दूसरे को कोस रहे हैं। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे सीन में सब कुछ जम गया है।