कार में बैठे उस लड़के का चेहरा देखकर लगता है कि वह किसी गहरी सोच में डूबा हुआ है। जब उसे 'क्लोई' का कॉल आता है तो वह पहले तो अनदेखा करता है लेकिन फिर बात करता है। उसकी आँखों में जो थकान और परेशानी दिख रही है, वह बहुत रियल लगती है। अब देर हो गई शायद उसे एहसास हो गया हो कि कुछ चीजें बदल चुकी हैं। उसका ब्लेजर और पिन उसकी अमीरी दिखाते हैं लेकिन दिल का हाल कुछ और ही कहानी कह रहा है।
हॉस्पिटल के गलियारे में खड़ी वह नर्स जब फोन उठाती है तो उसकी पूरी बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है। पहले वह क्रॉस्ड आर्म्स खड़ी थी, जैसे कुछ सोच रही हो, लेकिन फोन पर बात करते हुए वह इतनी खुश हो जाती है कि आसपास के लोग भी नोटिस कर रहे हैं। अब देर हो गई शायद उसे वह खबर मिल गई हो जिसका वह इंतजार कर रही थी। उसकी मुस्कान और आँखों की चमक सब कुछ बता रही है।
एक तरफ हॉस्पिटल की सादगी और नर्सों की दिनचर्या, दूसरी तरफ महंगी कार और अमीर लड़के की जिंदगी। जब ये दोनों दुनियां फोन कॉल के जरिए जुड़ती हैं तो कहानी में एक अलग ही रोमांच आ जाता है। अब देर हो गई लगता है कि इन दोनों के बीच कोई गहरा कनेक्शन है जो धीरे-धीरे सामने आ रहा है। डायलॉग नहीं हैं लेकिन एक्सप्रेशन सब कुछ कह रहे हैं।
जब फोन स्क्रीन पर 'क्लोई' का नाम आता है तो लड़के के चेहरे पर जो बदलाव आता है वह बहुत बारीकी से दिखाया गया है। पहले वह थका हुआ लग रहा था, लेकिन कॉल उठाने के बाद उसमें एक नई ऊर्जा आ जाती है। अब देर हो गई शायद उसे समझ आ गया हो कि क्या करना है। नर्स की तरफ से भी यही फीलिंग आ रही है, जैसे दोनों एक ही पल में जुड़ गए हों।
शुरुआत में नर्सों के बीच जो गॉसिप चल रही थी, वह अचानक रुक जाती है जब मुख्य किरदार को फोन आता है। बाकी नर्सों के चेहरे पर जो क्यूरियोसिटी दिख रही है, वह बहुत नेचुरल लगती है। अब देर हो गई लगता है कि अब गॉसिप नहीं बल्कि असली कहानी शुरू हो रही है। हॉस्पिटल का माहौल और फिर कार का सीन बहुत अच्छे से कट किया गया है।