नीली सूट पहने उस आदमी की हरकतें बेहद संदिग्ध लग रही थीं। वह बिस्तर पर बैठकर रिमोट से टीवी चलाता है और खबरें दिखाकर युवा एथलीट को डराने की कोशिश करता है। उसकी आवाज़ में गुस्सा और आँखों में एक अजीब सी चमक थी। लगता है अब देर हो गई है उस युवा के लिए इस जाल से निकलने की।
अचानक टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ चलती है जिसमें बर्फ़ीले इलाके में रिपोर्टिंग हो रही है। यह दृश्य कमरे के तनाव को और बढ़ा देता है। युवा एथलीट का चेहरा पीला पड़ जाता है जब उसे अहसास होता है कि मामला गंभीर है। अब देर हो गई है मासूमियत दिखाने की, क्योंकि सच्चाई सामने आ चुकी है।
युवा एथलीट का फोन पर बात करना और फिर घबराकर फोन रख देना, यह सब बहुत कुछ कह जाता है। उसकी आवाज़ कांप रही थी और माथे पर पसीने की बूंदें साफ़ दिख रही थीं। कमरे में मौजूद तीसरा शख्स चुपचाप सब देख रहा था। अब देर हो गई है उस लड़के के लिए झूठ बोलने की।
मेडिकल रूम जैसा यह कमरा असल में एक इंटरोगेशन रूम लग रहा था। दीवारों पर लगे पोस्टर्स और बिस्तर पर पड़ी चीज़ें माहौल को और भी अजीब बना रही थीं। युवा एथलीट की बेचैनी और सूट वाले का गुस्सा देखकर लगता है कि अब देर हो गई है शांति से बैठने की।
टैबलेट पर मौजूद मास्क पहने महिला की तस्वीर सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक सबूत लग रही थी। युवा एथलीट उसे बार-बार देख रहा था जैसे कोई राज़ सुलझाने की कोशिश कर रहा हो। सूट वाले की नज़रें उस पर जमी थीं। अब देर हो गई है उस राज़ को दबाने की।