जैसे ही वह व्यक्ति चैंबर से निकलकर सूट पहनकर बाहर आता है, उसकी चाल में एक नया आत्मविश्वास है। पार्किंग में मिलने वाला दूसरा शख्स भी रहस्यमयी लगता है। उनकी बातचीत में तनाव साफ झलकता है। लगता है अब देर हो गई और कुछ बड़ा होने वाला है। यह ट्विस्ट दिलचस्प है।
हरी वर्दी वाली डॉक्टर की आँखों में जो डर है, वह सब कुछ बता देता है। वह कंप्यूटर पर कुछ देखकर चौंक जाती है। शायद उसे पता चल गया है कि अब देर हो गई। उसकी चुप्पी और दूसरी डॉक्टर से हुई बहस में छिपा तनाव दर्शकों को बांधे रखता है। यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर जैसा लग रहा है।
काली रंग की लग्जरी कार का आगमन और उससे उतरने वाले व्यक्ति का स्टाइल बहुत प्रभावशाली है। सूरज की रोशनी में उसका सिलहूट किसी विलेन या हीरो जैसा लगता है। जब वह दूसरे व्यक्ति से मिलता है, तो हवा में तनाव तैरने लगता है। शायद अब देर हो गई और खेल शुरू हो चुका है।
अंदर बर्फ जैसी ठंडक और बाहर धूप की गर्माहट। यह विपरीत माहौल कहानी के दो पहलुओं को दर्शाता है। चैंबर में बंद व्यक्ति और बाहर खड़े लोग। डॉक्टर की घबराहट और बाहर की शांति। यह कंट्रास्ट बहुत गहरा है। लगता है अब देर हो गई और कुछ अनहोनी होने वाली है।
पीछे लगा नर्वस सिस्टम का चार्ट सिर्फ सजावट नहीं है। शायद इसी से जुड़ा कोई बड़ा राज है। डॉक्टर उस चार्ट की तरफ देखती है और फिर मरीज की तरफ। उसकी नज़रों में सवाल हैं। शायद उसे अब देर हो गई का अहसास हो चुका है। यह छोटा सा डिटेिल बहुत बड़ा मतलब रखता है।