महिला की आवाज में नरमी है, लेकिन युवक की प्रतिक्रिया में गुस्सा साफ झलकता है। जब वह गिलास तोड़ता है, तो लगता है जैसे उसका धैर्य भी टूट गया हो। अब देर हो गई का अहसास दोनों के चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता है। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी सुबह बड़ी कहानी कह सकती है।
लाल कंबल में लिपटा युवक और सफेद कोट पहने महिला—दोनों के बीच का रंगों का खेल भी उनकी भावनाओं को बयां करता है। जब युवक उठता है, तो उसके चेहरे पर दर्द साफ झलकता है। अब देर हो गई कहते हुए वह शायद अपने आप को समझा रहा है। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है।
लाल कंबल में लिपटा युवक जब उठता है तो उसके चेहरे पर दर्द साफ झलकता है। महिला के हाथ में पानी का गिलास देखकर लगता है कि रात कुछ ज्यादा ही भारी गुजरी होगी। अब देर हो गई कहने का मतलब शायद यही है कि सुबह होते ही सब कुछ बदल जाता है। कमरे की सजावट और दोनों के बीच की खामोशी दर्शकों को बांधे रखती है।
युवक की आंखों में जो थकान और पीड़ा है, वह शब्दों से ज्यादा बयां कर रही है। महिला की मुस्कान के पीछे छिपी चिंता भी साफ दिखती है। जब वह गिलास तोड़ता है, तो लगता है जैसे उसका धैर्य भी टूट गया हो। अब देर हो गई का अहसास दोनों के चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता है। यह दृश्य भावनाओं की गहराई को छूता है।
सफेद दीवारें, लाल कंबल और बीच में बैठा युवक—सब कुछ एक अजीब सी चुप्पी में डूबा हुआ है। महिला की आवाज में नरमी है, लेकिन युवक की प्रतिक्रिया में गुस्सा साफ झलकता है। अब देर हो गई कहते हुए वह शायद अपने आप को समझा रहा है। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी सुबह बड़ी कहानी कह सकती है।