जब वो लड़की शीशे के सामने खड़ी होकर अपने चेहरे के घाव देख रही थी, तो उस पल की दर्दनाक खामोशी ने दिल दहला दिया। शीशे की दरारें जैसे उसके टूटे हुए भरोसे का प्रतीक लग रही थीं। स्कूल इन्फर्मरी में बैंडेज बांधे फोन पर बात करते हुए उसकी आंखों में जो डर था, वो अब देर हो गई वाले अहसास को और गहरा कर गया।
स्वेटर वाले लड़के का रिएक्शन देखकर लगा कि वो सच में फंस गया है। एक तरफ खून से सनी लड़की और दूसरी तरफ वो लड़की जो रोने का नाटक कर रही थी। उसका हाथ पकड़कर सांत्वना देना और फिर गुस्से में आकर हमलावर को पकड़ना, ये सब इतना तेजी से हुआ कि अब देर हो गई। स्कूल की दीवारें गवाह हैं इस खूनी खेल की।
हेडबैंड वाली लड़की की मुस्कान के पीछे छिपी खूंखार सूरत देखकर यकीन नहीं हुआ। पहले वो रोती है, फिर अचानक हमला कर देती है। ये साइकोपैथिक व्यवहार इतना डरावना था कि अब देर हो गई का अहसास हुआ। जब वो लड़के के साथ चली गई और पीछे छोड़ गई एक तबाह लड़की, तो लगा ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
स्कूल इन्फर्मरी का वो सीन जहां लड़की बैंडेज बांधे अकेली बैठी है, बहुत इमोशनल था। नर्स के जाने के बाद उसका फोन उठाना और डरी हुई आवाज में बात करना, सब कुछ इतना असली लगा। चेहरे पर पट्टियां और आंखों में आंसू, ये मंजर अब देर हो गई वाले ड्रामे का क्लाइमेक्स लग रहा था।
फर्श पर गिरी लड़की के चेहरे से बहता खून और दीवार से टकराती उसकी चीखें, ये सब देखकर रूह कांप गई। दूसरी तरफ वो लड़की जो लड़के के कंधे पर सिर रखकर मुस्कुरा रही थी, उसकी चालाकी देखकर गुस्सा आया। जब सच सामने आया तो अब देर हो गई, क्योंकि भरोसा तो टूट चुका था।