लॉकर रूम का वो सीन देखकर बचपन की यादें ताजा हो गईं। हॉकी जर्सी पहने वो लड़का और स्कूल यूनिफॉर्म वाली लड़की, इनकी कहानी अधूरी लगती है। अब देर हो गई, शायद वो रेड हेलमेट ही उनकी जिंदगी का मोड़ था। डॉक्टर की आंखों में वो सब कुछ है जो वो बोल नहीं पा रही।
अचानक एंट्री लेने वाले इस सूट वाले शख्स ने माहौल बदल दिया। लगता है ये कोई वकील या एजेंट है जो कोई बुरी खबर लेकर आया है। मरीज के चेहरे के भाव देखकर लगता है कि उसकी दुनिया हिल गई है। अब देर हो गई, शायद ये वो पल था जिसका सबको डर था।
सिर्फ मरीज ही नहीं, डॉक्टर भी उतनी ही टूटी हुई लग रही है। उसने हेलमेट को ऐसे पकड़ा जैसे वो कोई कीमती चीज हो। शायद ये हेलमेट उनके बीच के रिश्ते की गवाही दे रहा है। अब देर हो गई, पर उनकी आंखों में अभी भी कुछ कहने को बाकी है।
नीली दीवारें और सफेद कोट, सब कुछ साफ-सुथरा है पर माहौल में एक अजीब सी बेचैनी है। मरीज का बिस्तर पर लेटना और डॉक्टर का खड़ा होना, ये पावर डायनामिक बहुत कुछ कहता है। अब देर हो गई, शायद इलाज से ज्यादा जरूरी कोई और बात थी।
वो पीला लिफाफा या फाइल जिसमें वो लड़का इतनी गहराई से देख रहा है, उसमें जरूर कोई बड़ा राज छिपा है। शायद उसकी करियर की रिपोर्ट हो या कोई मेडिकल टेस्ट। अब देर हो गई, पर उसकी उंगलियां कांप रही हैं, जो डर को जाहिर कर रही हैं।