लिफ्ट के दरवाजे खुलते ही जो शख्सियत बाहर आई, उसने माहौल बदल दिया। काले सूट में वह इतना प्रभावशाली लग रहा था कि सबकी सांसें रुक गईं। अब देर हो गई थी, क्योंकि उसकी नजरें सीधे डॉक्टर पर थीं। यह टकराव अगले एपिसोड की उम्मीद बढ़ाता है।
पीछे खड़ी नर्सों के चेहरे पर जो डर और बेचैनी थी, वह बिल्कुल असली लग रही थी। जब मुख्य डॉक्टर तनाव में थी, तो उनकी प्रतिक्रियाओं ने सीन को और गहरा बना दिया। अब देर हो गई थी, क्योंकि हर कोई उस सर्जन के बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
सर्जन के मास्क पहने होने के बावजूद, उसकी आँखों में थकान और राहत दोनों साफ दिख रहे थे। जब डॉक्टर ने उसे गले लगाया, तो लगा जैसे सब कुछ ठीक हो गया। अब देर हो गई थी, क्योंकि यह पल बहुत देर से आया था। मास्क के नीचे भी भावनाएं छिपी नहीं रह सकतीं।
लिफ्ट के नंबर बढ़ते गए और तनाव भी। जब दरवाजे खुले और वह शख्स बाहर आया, तो लगा जैसे कोई राजकुमार आया हो। अब देर हो गई थी, क्योंकि डॉक्टर उसका इंतजार कर रही थी। यह मुलाकात अचानक नहीं, बल्कि नियति की तरह लगी।
जब डॉक्टर ने फोन देखा और रो पड़ी, तो लगा जैसे उसका सारा संयम टूट गया। अब देर हो गई थी, क्योंकि वह सब कुछ सह चुकी थी। उसका गले लगाना और फिर बात करना, यह सब इतना भावुक था कि आँखें नम हो गईं।