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अब देर हो गई

हार्पर कॉलिन्स, एक प्रतिभाशाली छात्रा जो सर्जन बनने का सपना देखती है, गुप्त रूप से ड्रेको आर्मस्ट्रॉन्ग के लिए नौकरानी और प्रेमिका बनकर काम करती है। लेकिन जब ड्रेको अपनी पहली मोहब्बत को प्रभावित करने के लिए उसका शोध चुरा लेता है, तो हार्पर की ज़िंदगी और प्रतिष्ठा बर्बाद हो जाती है। वह बिना बताए लॉस एंजेलिया छोड़कर अंटार्कटिकी चली जाती है। पाँच साल बाद “डॉक्टर ई” के रूप में लौटकर, वह सब कुछ बदलने के लिए तैयार है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शराब की बोतलें और टूटे सपने

कमरे में फैली नीली रोशनी और टेबल पर पड़ी खाली बोतलें सिर्फ माहौल नहीं, बल्कि ड्रेक की आत्मा का आईना हैं। जब वो फोन पर चिल्ला रहा था, तो लगा जैसे वो किसी से नहीं, बल्कि अपनी किस्मत से लड़ रहा हो। अब देर हो गई की ये कहानी बताती है कि कुछ फैसले इंसान को अंदर से कैसे खोखला कर देते हैं। उस लड़की की आँखों में जो दर्द था, वो शायद ड्रेक की नींदें हमेशा के लिए छीन लेगा।

टीवी स्क्रीन पर मौत का साया

बीबीसी न्यूज़ की वो हेडलाइन और बर्फ़ में लिपटी वो लड़की, सब कुछ इतना वास्तविक लगा कि रोंगटे खड़े हो गए। ड्रेक का चेहरा देखकर लगा जैसे वो अपनी ही कब्र खोद रहा हो। अब देर हो गई शीर्षक इस कहानी की रूह है, क्योंकि जब इंसान अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करता है, तो दुनिया उसे माफ़ नहीं करती। उस लड़की का गिरना और ड्रेक का रोना, दोनों एक ही त्रासदी के दो पहलू हैं।

डायरी के पन्नों में छिपा राज

जब ड्रेक ने वो पुरानी डायरी खोली, तो लगा जैसे उसने अपनी ही कब्र का पत्थर हटा दिया हो। 'अलविदा प्रिय आर्मस्ट्रांग' लिखा था उसमें, और उस पल उसकी आँखों में जो खामोशी थी, वो चीखों से ज्यादा शोर मचा रही थी। अब देर हो गई की ये कहानी बताती है कि कुछ रिश्ते इतने गहरे होते हैं कि उनका अंत इंसान को जीवित लाश बना देता है। बर्फ़ और आँसू, दोनों ही ठंडे हैं, पर दिल को जला देते हैं।

बर्फ़ में दफन हुई उम्मीदें

उस लड़की का बर्फ़ में गिरना और ड्रेक का सोफे पर टूट जाना, दोनों दृश्य इतने दर्दनाक थे कि सांस रुक गई। अब देर हो गई शीर्षक इस कहानी की नियति है, क्योंकि जब इंसान अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करता है, तो दुनिया उसे माफ़ नहीं करती। उस लड़की की आँखों में जो दर्द था, वो शायद ड्रेक की नींदें हमेशा के लिए छीन लेगा। बर्फ़ की वो दुनिया और ड्रेक का अंधेरा कमरा, दोनों एक ही त्रासदी के दो पहलू हैं।

फोन की घंटी और टूटा दिल

जब ड्रेक का फोन बजा और उसने स्क्रीन पर वो नाम देखा, तो उसका चेहरा बदल गया। तीन महीने बाद की ये तस्वीर बताती है कि कैसे इंसान अपनी गलतियों के बोझ तले दब जाता है। अब देर हो गई शीर्षक बिल्कुल सही है, क्योंकि जब सच्चाई सामने आती है, तो पछतावा ही हाथ लगता है। उस लड़की का बर्फ़ में गिरना और ड्रेक का रोना, दोनों एक ही त्रासदी के दो पहलू हैं।

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